
भोपाल। नंबर 13, सुनते ही लोग अपना हर शुभ काम टाल देते हैं। तो कोई 13 नंबर आते ही अशुभ और अनहोनी के डर से भर जाता है। लोगों के दिलों में खौफ पैदा करने वाले इस 13 नंबर के बारे में लगभग हर धर्म के लोगों की धारणाएं अलग-अलग हैं। यहां तक कि कई देशों में भी इस नंबर को लेकर अंधविश्वास ऐसा जुड़ा है कि उसने पूरे समाज को अपने शिकंजे में कस रखा है। यह बात शायद आपको भी पता नहीं कि हमारे देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में कई बिल्डिंग ऐसी हैं जहां 13वां फ्लोर ही नहीं है। भारत से निकलकर जब हम दूसरे देशों की बात करें तो पाएंगे कि यूरोप के ज्यादातर लोग 13 तारीख को पडऩे वाले शुक्रवार को अशुभ मानते हैं, जबकि ग्रीस में शुक्रवार के बजाय मंगलवार को बुरा दिन माना जाता है। यहां ज्योतिषाचार्य, टैरो कार्ड रीडर और अंक ज्योतिष अंजना गुप्ता आपको बता रही हैं कि इस अंक को शुभ माना गया है या अशुभ। हालांकि 13 नंबर से डरने को थर्टीन डिजिट फोबिया भी कहा गया है।
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क्या है 13 का डर या थर्टीन डिजिट फोबिया
दरअसल पाश्चात्य संस्कृति और ज्योतिष में 13 के अंक को ही अशुभ माना जाता है। माना जाता है कि यह व्यक्ति के लिए मनहूस होता है, दुर्भाग्य लाता है और मृत्यु का भी कारण बन सकता है। इस तरह वहां कई मान्यताएं फैली हुई हैं। अंकशास्त्र के हिसाब से भी इस नंबर को शुभ नहीं माना जाता है। ऐसा इसलिए भी है क्योंकि 12 नंबर पूर्णता का प्रतीक माना गया है। इसमें एक और नंबर जोडऩा यानि बुरे भाग्य का संकेत होना माना गया है। पश्चिमी देशों में कई होटल्स में 13वें नंबर का कमरा होता ही नहीं है। इटली के कई ओपरा हाउस में 13 नंबर का किसी भी तरह प्रयोग करने से बचा जाता है। फ्रांस में भी खाने की टेबल पर 13 चेयर्स नहीं होतीं। 13 की संख्या में पैसों का लेन-देन तक नहीं किया जाता। लेकिन एक्सपर्ट की मानें तो इसे लेकर लोगों के बीच भ्रम है और बार-बार बताया गया है कि इसमें कोई सच्चाई नहीं है।
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ऐसे हुई 13 से डर की शुरुआत
कहा जाता है कि 13 से डरने की शुरुआत जीसस क्राइस्ट के समय से हुई थी। बाइबिल की कहानियों के अनुसार जीसस के 13 शिष्य थे। उनमें से 13वें नंबर के शिष्य ने ही जीसस के साथ विश्वासघात किया और उनकी हत्या का कारण बना। एक मान्यता के अनुसार वह खाने की टेबिल पर 13 नंबर की चेयर पर बैठा हुआ था। बाद में इस नंबर को अशुभ मान लिया गया और जैसे-जैसे दुनिया में ईसाईयत बढऩे लगी, यह मान्यता भी फैलने लगी। आज पूरे विश्व में 13 नंबर को अशुभ माना जाता है।
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सनातन धर्म में शुभ माना जाता है 13वां दिन
जबकि सनातन धर्म में किसी भी महीने की 13 तारीख को बड़ा ही महत्वपूर्ण माना गया है। वैदिक कैलेंडर के अनुसार 13वां दिन त्रयोदशी का होता है। जो कि भगवान शिव को अर्पित होता है। प्रदोष व्रत भगवान शिव के लिए रखा जाता है जो कि महीने के 13वें दिन पर आता है। इस दिन जो भी यह व्रत रखता है, वह पैसे, बच्चे, खुशियों और समृद्धि से भर जाता है। यही नहीं महा शिवरात्रि भी माघ महीने के 13वें दिन की रात्रि में मनाई जाती है, इसलिए हिंदू धर्म में 13 नंबर को अशुभ नहीं बल्कि, शुभ ही माना जाता है। प्रदोष को समस्त कार्यों के लिए शुभ मान कर मुहूर्त भी निकाले जाते हैं। ज्योतिषियों के अनुसार अंक 13 शुभ होता है, इस दिन आप किसी भी शुभ कार्य को शुरू कर सकते हैं, नया काम स्टार्ट कर सकते हैं। अत: आपको इससे डरना नहीं चाहिए।
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