धार बस डिपो की जमीन होगी नीलाम

आशीष यादव । सालों से बंद पड़े बस डिपो की जमीन अब सरकार बेचने के मूड में है। सरकार ने एक विज्ञप्ति भी जारी की है। 25 करोड़ से बोली की शुरुआत होगी। इसको लेकर टेंडर प्रक्रिया होगी। डिपो के बाहर वर्षों से संचालित हो रही दुकानें नियम व विधि से खरीदी थीं, उन दुकानदारों में गुस्सा भी है और उन्हें चिंता भी सत्ता रही है कि यह कैसे हो गया। अब हमारी दुकानों का क्या होगा?

जैसे ही लोगों को डिपो के बिकने की बात पता चली तो उनके चेहरों पर मयूसी छा गई। सरकार के लोक संपत्ति प्रबंधन विभाग ने इसके लिए नीलामी की प्रक्रिया शुरू कर दी है। सोमवार से ई.टेंडर शुरू हो चुके हैं। इसके तहत 0.7724 हेक्टेयर यानी 7 हजार 724 वर्ग मीटर जमीन की नीलामी होगी। इसकी बेस प्राइस 25 करोड़ 56 लाख रुपए रखी गई है। 17 नवंबर को डले टेंडर में शामिल होने वाले खरीदार जमीन अपने नाम करवाने के लिए बोली में शामिल हो सकेंगे। ऑनलाइन बोली के माध्यम से जमीन नीलाम की जाना प्रस्तावित की गई है। नीलामी खत्म होने के बाद वित्तीय बीड खोल दी जाएगी।

डिपो का होता था संचालन
मप्र राज्य परिवहन निगम की इस बेशकीमती जमीन पर एक वक्त बस स्टैंड का संचालन किया जाता था, लेकिन डिपो बंद होने के बाद से यहां से बस स्टैंड आगे की तरफ शिफ्ट हो गया। लंबे वक्त से डिपो की जमीन खाली पड़ी है। इन दिनों सिर्फ यहां वे बसें खड़ी रहती है जिन्हें अपने रूट पर जाने में वक्त रहता है। साथ ही लोगों ने कब्जा कर रखा है।
नए निवेश की उम्मीद
बारिश के पूर्व मप्र सडक़ विकास प्राधिकरण के माध्यम से जमीन का सर्वे करवाया गया था। इसके बाद लोक संपत्ति प्रबंधन विभाग ने संपत्ति नीलामी के लिए निविदा जारी की है। सोमवार को ई.नीलामी की टेंडर प्रक्रिया जारी कर दी गई है। इसके तहत खरीदार 16 नवंबर तक विभाग को दस्तावेज सहित अन्य जरूरी जानकारी जमा करवा सकता है। 17 नवंबर को जमीन की नीलामी की प्रक्रिया होना है। जमीन नीलामी के बाद यहां पर नए निवेश की संभावना है। इससे शहर में नए अवसर मिलने की उम्मीद रहेगी।
16 दुकानें हो रही संचालित
डिपो कॉम्प्लेक्स के बाहर 16 दुकानों में अलग-अलग व्यापारी अपना कामकाज संचालित करते हैं। जबकि डिपो के भीतर बसों को खड़ा किया जा रहा है। वहीं रोज कमाकर अपना जीवन यापन करने वाले अपना कारोबार चला रहे हैं। यह सालों से चलता आ रहा है। आसपास मोहल्लों के रहवासी यहां कचरा भी यहां डालते हैं। डिपो के पुराने भवन जर्जर हो चुके है।



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