एनएच-59 पर उड़ रहे धूल के गुबार, लोगों का जीना दूभर

खातेगांव। खातेगांव में सडक़ों पर उड़ते धूल के गुबार ने लोगों का जीना दूभर कर दिया है। रहवासी क्षेत्र होने के साथ ही इस मार्ग पर दुकानें व स्कूल भी संचालित हो रहे हैं। धूल की चपेट में आने के कारण लोगों को एलर्जी, दमा और श्वांस की बीमारियों होने की आशंका बढ़ गई है।

रहवासी क्षेत्र से होकर गुजरने वाले इस हाईवे की ओर किसी का भी ध्यान नहीं होने से लोगों में आक्रोश है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह मार्ग नगरीय क्षेत्र की सीमा से लगा हुआ है। बागदी नदी से दाना बाबा तक उठ रहे धूल के गुबार ने लोगों का जीना दूभर कर दिया है। दीपावली के त्योहार के मद्देनजर रहवासी क्षेत्र के लोग अपने मकानों में रंगाई पुताई कर रहे हैं, लेकिन धूल उनकी मेहनत पर पानी फेर रही है। होटलों की खाद्य सामग्री धूल के कारण दूषित हो रही है।

खातेगांव से गुजरने वाले इंदौर-बैतूल नेशनल हाईवे 59 कंडम हो चुका है। इस पर उड़ती धूल से पैदल चलने वाले,साइकिल, दोपहिया वाहन से आवाजाही करने वाले लोगों की मुसीबत हो रही है। इस मार्ग पर बसे रहवासियों का जीना मुहाल हो चुका है। इस मार्ग से जैसे ही चार पहिया वाहन निकलते हैं तो पीछे से धूल के गुबार उठते हंै। इस धूल से सर्वाधिक परेशानी सडक़ के समीप बसे लोगों को हो रही है। उनका सामान, कपड़े व खाना आदि धूल की भेंट चढ़ जाता है। घर में मरीज, छोटे बच्चों व बूढ़ों को खांसी की परेशानी हो रही है। यदि शीघ्र इस सडक़ की मरम्मत नहीं की गई इसके किनारे बसे अधिकांश लोग श्वांस की बीमारी की चपेट में आ जाएंगे। कई लोग अपने परिवार के स्वास्थ्य को लेकर चिंतित नजर आ रहे हैं।
इसी तरह इस मार्ग से स्कूल आने-जाने वाले बच्चों की यूनिफॉर्म धूल धूसरित हो जाती है। स्कूल में वे धूल में सने होकर पहुंचते हैं। धूल के गुबार इन स्कूलों तक पहुंच रहे हैं जो मुसीबत का कारण बनते जा रहे हैं। धूल से राहत मिले इसके लिए सीमेंट कांक्रीट या डामरीकरण करना जरूरी है। एन एच 59 के जिम्मेदार अधिकारी और इंजीनियर लोगों के स्वास्थ्य से खुला खिलवाड़ कर रहे हैं। कुछ जागरूक नागरिकों ने इससे राहत के लिए न्यायालय के दरवाजे भी खटखटाने का मन बना लिया।



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