<p style="text-align: justify;">जब भी आप जमीन खरीदते है तब आपको उस का एक विशेष नंबर प्राप्त होता है जिसे खसरा नंबर कहते हैं. आप की अपनी जमीन के दस्तावेजों में भी ये खसरा नंबर दर्ज रहता है. जब भी आप ऑनलाइन या ऑफलाइन किसी जमीन के रिकॉर्डस का अध्ययन करेंगे तो आपको कई जगह पर इस खसरा शब्द का उल्लेख मिलेगा. आज हम आपको बता रहे है कि आखिर ये खसरा शब्द क्या होता है और जमीन के दस्तावेजों में इसका क्या महत्व है. </p> <p style="text-align: justify;"><strong>क्या होता है खसरा नंबर </strong></p> <p style="text-align: justify;">खसरा एक ईरानी शब्द है. खसरा नंबर गांवों में जमीन के एक टुकड़े को दिया जाता है. प्रशासन गांवों का नक्शा लेते हैं और उस गांव की हर जमीन के टुकड़े को खसरा नंबर देते हैं. वहीं शहरी इलाकों में, जमीन के टुकड़ों को प्लॉट नंबर्स या सर्वे नंबर दिए जाते हैं, जो ग्रामीण इलाकों के खसरा नंबर के बराबर होता है. जमीन की भौगौलिक जानकारी के अलावा, खसरा नंबर जमीन के टुकड़े का आकार, वो कितनी उपजाऊ है, उसपर कौन सी फसल उग रही है और कितने पेड़ उगे हैं इसकी जानकारी देता है.</p> <p style="text-align: justify;">खसरा नंबर के जरिये आप जमीन के मालिकाना हक की जानकारी भी पा सकते हैं जो कि पिछले 50 साल तक का हो सकता है.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>क्या है खसरा नंबर की जरुरत </strong></p> <p style="text-align: justify;">जमीन के मालिकाना हक को लेकर खसरा नंबर बेहद जरूरी है. लोग अपनी जमीन पर नजर रख सकें और कोई भी व्यक्ति उस पर कब्जा ना कर सके इसके लिए खसरा नंबर काफी अहम है. यहां ये जानकारी भी अहम है कि जब किसी जमीन के टुकड़े का बंटवारा होता है तो उसका खसरा नंबर भी बदल जाता है. उदाहरण के तौर पर यदि किसी जमीन के टुकड़े का खसरा नंबर 80 है और बाद में इसका दो हिस्सों में बंटवारा हो जाता है. तो ऐसी स्थिति में इन खसरा नंबर भी दो हिस्सों में बंट जाएगा और 80/1 और 80/2 हो जाएगा.</p> <div style="text-align: justify;"><strong>किन राज्यों में होता है खसरा नंबर का इस्तेमाल </strong></div> <div style="text-align: justify;"> </div> <div style="text-align: justify;"><span style="font-family: -apple-system, BlinkMacSystemFont, 'Segoe UI', Roboto, Oxygen, Ubuntu, Cantarell, 'Open Sans', 'Helvetica Neue', sans-serif;">उत्तर और मध्य भारत के कई राज्यों में इसका इस्तेमाल किया जाता है. जमीन से जुड़े रिकॉर्ड्स की अहम जानकारी रखने के लिए खसरा नंबर का इस्तेमाल होता है. जिन राज्यों में इसका इस्तेमाल होता है उनमें मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार और झारखंड शामिल हैं. </span></div> <div> <p style="text-align: justify;"><strong>किसी जमीन का खसरा नंबर कैसे मालूम करें </strong></p> <p style="text-align: justify;">किसी जमीन का खसरा नंबर हासिल करने के लिए, आपको गांव की तहसील या फिर जनसुविधा केंद्र में जाना होगा. आप इसके लिए राजस्व विभाग की वेबसाइट पर भी जा सकते हैं क्योंकि अधिकतर राज्य इसे ऑनलाइन भी मुहैया कराते हैं. अधिकतर बार यह जानकारी संबंधित राज्य की भूलेख वेबसाइटस पर उपलब्ध होती है.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>यह भी पढ़ें </strong></p> <p style="text-align: justify;"><strong><a href="https://www.abplive.com/news/india/33-crore-indian-adults-may-currently-be-hesitant-to-take-the-covid-vaccine-says-localcircles-survey-1932552">देश में 33 करोड़ व्यस्कों में अभी भी वैक्सीन को लेकर हिचकिचाहट, सरकार को और जागरुकता फैलाने की जरूरत- सर्वे</a></strong></p> <p style="text-align: justify;"><strong><a href="https://ift.tt/3dhMpAL Plus Variant: राजस्थान में जिस महिला में मिला डेल्टा प्लस वेरिएंट, उसे लग चुकी हैं वैक्सीन की दोनों डोज</a></strong></p> </div>
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