इंदौर। मध्यप्रदेश में डेल्टा प्लस वैरिएंट की आशंका देखते हुए इंदौर सहित प्रदेश के अन्य शहरों से हर माह सैंपल जांच के लिए नई दिल्ली स्थित एनसीडीसी भेजे जाएंगे। स्वास्थ्य संचालनालय भोपाल से सभी सीएमएचओ व मेडिकल कॉलेजों को हाल ही में दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। प्रदेश के सभी जिलों की आरटीपीसीआर लैब व एसआरएल लैब समेत 2 निजी लैब के माध्यम से हर 15 दिन में सैंपल भेजे जाएंगे। साथ ही जिन मरीजों के सैंपल भेजे जाएंगे उन्हें आइसोलेट कर उनकी कांटेक्ट ट्रेसिंग की जाएगी। संक्रमण को रोकने के लिए सैंपल की जिनोम सिक्वेंसिंग भी की जाएगी।
अभी तक नहीं मिला डेल्टा प्लस
एमजीएम मेडिकल कॉलेज द्वारा इंदौर के साथ खरगोन के 11 सैंपल हर 15 दिन में भेजेंगे। इंदौर में अभी डेल्टा प्लस का एक भी मरीज सामने नहीं आया है लेकिन भोपाल, उज्जैन और अशोक नगर में इसके मरीज सामने आ चुके हैं। इधर, इंदौर से 700 सैंपल जीनोम सिक्वेंसिंग के लिए भेजे हैं जिनमें से अप्रैल तक भेजे 350 सैंपल की रिपोर्ट आई है। इनमें से एक में भी डेल्टा प्लस नहीं मिला है।
अब भोपाल में लगेगी जीनोम सिक्वेंसिंग मशीन
जीनोम सिक्वेंसिंग की जांच अब भोपाल में होगी। चिकित्सा सैंपल दिल्ली भेजे जाते हैं, जिसमें समय लगता है। उधर, इंदौर में बैठक के दौरान स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव मोहम्मद सुलेमान ने कहा, डेल्टा प्लस को लेकर सरकार गंभीर है। जल्द ही प्रदेश में जीनोम सिक्वेंसिंग शुरू होगी। इसके लिए एनसीडीसी के प्रभारी सुजीतसिंह ने सीएम शिवराज सिंह चौहान को आश्वस्त किया है।
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