ब्लॉगः कुंद क्यों होती जा रही है आरटीआई की धार

पारदर्शी और भ्रष्टाचारमुक्त शासन प्रक्रिया सुनिश्चित करने के लिए सूचना का अधिकार कानून यानी आरटीआई एक्ट अस्तित्व में आया। 12 अक्टूबर, 2005 को भारत में लागू हुए इस कानून ने देश के नागरिकों को एक मायने में वास्तविक स्वतंत्रता दी। लेकिन आज 15 साल बाद भी इसके रास्ते में कई बाधाएं खड़ी हैं। जरूरत आरटीआई कानून को मजबूत करने की है। लोगों को सही जानकारी समय पर नहीं मिल पा रही। फिर भी कोई राजनीतिक पार्टी या सरकार इसके लिए कुछ करने को तैयार नहीं है। सच पूछें तो आरटीआई अधिनियम का कोई संरक्षक नहीं है। केंद्र और राज्यों में आरटीआई के नियमों की भिन्नता से इस क्रांतिकारी कानून पर संकट मंडरा रहा है।

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