डेपसांग में सेना भेजकर ध्यान भटना रहा चीन

नई दिल्ली भारत और चीन के बीच लद्दाख में जो कुछ हो रहा उसपर इन दिनों सबकी नजर है। दोनों देशों के बीच हिंसक झड़प हुई और फिर बातचीत का दौर भी शुरू हो गया। लेकिन एक्सपर्ट साफ देख रहे हैं कि चीन ऐसे बाज आनेवाला नहीं है। दरअसल ऊपर से यह सिर्फ बॉर्डर विवाद जैसा दिख रहा हो लेकिन इसके पीछे चीन की बड़ी प्लानिंग है। और अपनी इस प्लानिंग को पूरा करने के लिए चीन फिर ऐसी कोशिश करता रहेगा। पढ़ें- इस सबके पीछे वजह चीनी राष्ट्रपति शी चिनपिंग की बड़ी योजना बेल्ट ऐंड रोड है। यह शिनजियांग से काराकोरम पास, फिर सियाचिन से होते हुए पाकिस्तान और बलूचिस्तान तक पहुंचेगा। चीन चाहता है कि पूरी गलवान घाटी उसकी हो जाए जिससे उसके इस रूट को कोई खतरा न रहे। एक्सपर्ट मानते हैं कि चीनी सैनिक भले अभी गलवान घाटी से वापस जाने को राजी हों, लेकिन वह फिर वापस जरूर आएंगे। तो क्या ध्यान हटाने की कोशिश है डेपसांग में तैनाती? एक्सपर्ट यह भी मानते हैं कि गलवान घाटी पर पूरी तरह कब्जा करने के लिए चीन ने बड़ी प्लानिंग की है। गुरुवार को खबर आई थी कि चीन गलवान से सैनिक हटाने को राजी है लेकिन उसने डेपसांग में PLA की तैनाती कर दी है। डेपसांग काराकोरम और भारतीय हवाई पट्टी के पास है। एक्सपर्ट मानते हैं कि यह ध्यान भटकाने की कोशिश का हिस्सा हो सकता है। कि भारत अगर सैनिकों की तैनाती गलवान से ज्यादा डेपसांग में कर दे तो गलवान में वह जमीन कब्जाने की कोशिश कर सकता है। डेपसांग सामरिक तौर पर इसलिए अहम है कि यह भारत के दौलत बेग ओल्डी (डीबीओ) एयरस्ट्रिप के करीब है। यहां से काराकोरम पास भी लगभग 30 किलोमीटर दूर है। भारतीय सेना ने यहां पहले ही बड़ी संख्या में सैनिकों की तैनाती की है। यहां पर भारतीय फौज एलएसी के काफी करीब है। पूरे एलएसी में दोनों तरफ से सैनिकों की तैनाती लगातार बढ़ रही है। दौलत बेग ओल्डी (डीबीओ) ने बढ़ाई चीन की चिंता डेपसांग के पास चीनी सेना की तैनाती उसका डर भी दिखाती है। दरअसल, इसकी मदद से भारत चीन के किसी भी हमले का सामना करने को तैयार हो गया है। क्योंकि इसने लेह से सेना की पहुंच आसान कर दी है। चीन को यह भी डर है कि डीबीओ की वजह से भारत की पहुंच शिनजियांग तक हो सकती है।


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