इंदौर। सिख समाज की राजनीति उफान पर है। जैसा कि अंदेशा था कि बॉबी छाबड़ा की पकड़ समाज में कमजोर हो गई है जो अब मोनू भाटिया के सहारे विरोधियों पर फतह करना चाहता हैं। ठीक वैसे समीकरण सामने आ रहा है। बॉबी के खास लोगों ने भरी सभा में अध्यक्ष व सचिव पद के लिए टीम मोनू का समर्थन कर दिया। बदली हुई राजनीति देख समाजजन सकते में हैं।
अकाल तख्त से आए पर्यवेक्षक परमपालसिंह ने पिछले दिनों 13 अगस्त को इंदौर की सबसे बड़ी व प्रतिष्ठित संस्था श्री गुरुसिंघ सभा के चुनाव की घोषणा कर दी थी। पत्र जारी होने के बाद से खामौशी थी, लेकिन दो दिन पहले अचानक राजनीति गरमा गई। मध्यप्रदेश छत्तीसगढ़ गुरुसिंघ सभा के अध्यक्ष मोनू भाटिया के पिता गुरुदीपसिंह भाटिया की जन्मतिथि पर प्रताप नगर गुरुद्वारा में कीर्तन का आयोजन था। बड़ी संख्या में समाजजन पहुंचे थे जिसमें चौंकाने वाला घटनाक्रम हुआ।
खालसा कॉलेज के अध्यक्ष चरणजीतसिंह सैनी ने श्री गुरुसिंघ सभा के चुनाव में खालसा पैनल की ओर से मोनू भाटिया को अध्यक्ष और सुरजीतसिंह टुटेजा को सचिव का प्रत्याशी घोषित कर दिया। इस बात का समर्थन पीपल्याराव गुरुद्वारा के अध्यक्ष बंटी भाटिया ने भी किया। कहना था कि बॉबी छाबड़ा और मोनू भाटिया की टीम मिलकर चुनाव लड़ेगी जिसमें ये दोनों उम्मीदवार होंगे।
हालांकि उन्होंने अन्य पदों को लेकर कोई खुलासा नहीं किया। चूंकि दोनों ही बॉबी छाबड़ा के खास हैं जिसकी वजह से घोषणा को अधिकृत भी माना जा रहा है। जैसे ही ये बात सामने आई वैसे ही समाज में हलचल तेज हो गई। सभी सकते में आ गए, क्योंकि मोनू ने बॉबी से दूरी बनाकर रखी थी।
बॉबी की टीम में बगावत खालसा कॉलेज अध्यक्ष सैनी और भाटिया की घोषणा के बाद टीम बॉबी में भी बगावत हो गई। बॉबी के खास चरणजीतसिंह खनूजा और राजू भाटिया ने विरोध कर दिया। कहना है कि ये अधिकृत घोषणा नहीं है। बंटी भाटिया हमारे अध्यक्ष के प्रत्याशी होंगे।
ये हो सकता है गणित
गौरतलब है कि बॉबी छाबड़ा की सामाजिक तौर पर पकड़ कमजोर हो गई है जिसके चलते वे अपने बूते पर अपनी खालसा पैनल लड़ाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे थे। पिछले कई दिनों से वे अलग-अलग लोगों की पार्टियां कर रहे थे फिर भी परिणाम सामने नहीं आ रहे थे। उनके सामने मोनू भाटिया के समझौता करने के अलावा कोई विकल्प नहीं था। इसके अलावा दोनों के बीच समझौते की एक वजह ये भी हो सकती है कि बॉबी नहीं चाहता था कि खालसा कॉलेज का चुनाव हो और मोनू भाटिया ने सिख समाज की राजनीति में कदम ही कॉलेज के चुनाव कराने की मांग के साथ रखा था। दोनों में ये सहमति बन सकती है कि अब मोनू खालसा के चुनाव की बात नहीं करेंगे तो बॉबी खुलकर सभा के चुनाव में मदद करेंगे।
अकाल तख्त के जत्थेदार आए इंदौर
अकाल तख्त के जत्थेदार हरप्रीतसिंह दो दिन पहले इंदौर आए। बताया जा रहा है कि मोनू भाटिया के निवास पर रुके हैं। हालांकि उनका दौरा निजी है जिसका सभा के चुनाव से कोई लेना-देना नहीं है।
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