वामन द्वादशी कथा
धर्म ग्रंथों के अनुसार देव माता अदिति ने भगवान विष्णु की तपस्या की थी। इस समय भगवान विष्णु वे उन्हें वरदान दिया था कि उनके पुत्र के रूप में जन्म लेकर देवताओं को दैत्यराज बलि के भय से मुक्त करेंगे।
बाद में चैत्र शुक्ल द्वादशी के दिन श्रवण नक्षत्र और अभिजित मुहूर्त में भगवान विष्णु ने महर्षि कश्यप और माता अदिति के घर वामन रूप में जन्म लिया था और दानवीर राजा बलि से तीन पग धरती मांगी, राजा के संकल्प लेने पर भगवान वामन ने विराट रूप धारण किया और दो पग में ही त्रिलोक नाप लिया और पूछा तीसरा पग कहां रखूं। इस पर राजा बलि ने कहा, अब तो मेरा सिर ही बचा है। भगवान ने राजा बलि के सिर पर पांव रख दिया और राजा बलि की दानवीरता से प्रसन्न होकर उन्हें पाताल का राजा बना दिया और देवताओं को स्वर्ग लौटा दिया।
वामन द्वादशी पूजा ऐसे करें
1. वामन द्वादशी के दिन भगवान वामन की मूर्ति या चित्र के सामने पूजा करनी चाहिए।
2. मूर्ति है तो दक्षिणावर्ती शंख में गाय का दूध लेकर भगवान का अभिषेक करें।
3. विधि विधान से भगवान की पूजा के बाद कथा सुनें।
4. इस दिन चावल दही मिश्री का दान कर किसी गरीब या ब्राह्मण को भोजन कराना चाहिए।
5. व्रत का उद्यापन जब करना हो तो पंडित जी को एक माला, दो गौमुखी मंडल, छाता, आसन, गीता, लाठी, फल, खड़ाऊं और दक्षिणा देकर विदा करना चाहिए।
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वामन द्वादशी उपाय (Vaman Dwadashi Upay)
1. भगवान वामन की कृपा प्राप्त करने के लिए इस दिन कांसे के बर्तन में घी का दीया जलाएं। इससे गृह क्लेश से मुक्ति मिलती है।
2. कारोबार में उन्नति और नौकरी में प्रमोशन के लिए भगवान वामन को नारियल पर यज्ञोपवीत लपेटकर चढ़ाएं।
3. वामन द्वादशी पूजा के बाद दही का दान शुभ माना जाता है, इससे आर्थिक उन्नति होती है।
4. वामन द्वादशी पूजा के दिन भगवान वामन की मूर्ति पर दक्षिणावर्ती शंख में दूध डालकर भगवान वामन का अभिषेक करना चाहिए। इससे मनोवांछित फल प्राप्त होता है, शारीरिक कष्टों से भी मुक्ति मिलती है।
5. भगवान वामन की पूजा के समय भोग के लिए 52 पेड़े या लड्डू रखें, इससे भगवान वामन प्रसन्न होंगे। इसके बाद ब्राह्मणों को भोजन कराएं और दान दें। इससे मन को शांति मिलती है।
6. पुत्र प्राप्ति के लिए इस दिन पयोव्रत अनुष्ठान कर सकते हैं।
7. स्वस्थ और निरोगी रहने के लिए वामन द्वादशी के दिन भगवान को शहद चढ़ाकर उसका नित्य सेवन करना चाहिए।
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