इंदौर। एक समय था जब इंदौर नगर निगम के टिकट को लेकर सुमित्रा महाजन और कृष्णमुरारी मोघे के घर भीड़ लगा
करती थी। एक तरह से ये शक्ति केंद्र हुआ करते थे, लेकिन अब मजमा मौजूदा सांसद और नगर भाजपा अध्यक्ष के पास लग रहा है। इसकी एक बड़ी वजह विधायक भी हैं। वे प्रत्यक्ष रूप से भलाई-बुराई से बच रहे हैं।
नगर निगम के चुनाव में वर्षों से भाजपा का वजूद रहा है। चाहे देश व प्रदेश में विपरीत परिस्थितियां क्यों ना रही हों। पार्टी ने 1983 में नेताओं की एक बड़ी फौज तैयार की थी जो आज भी राजनीति में सक्रिय है। भाजपा के जन्म यानी 1980 से पार्टी में अलग- अलग शक्ति केंद्र रहे हैं। 1996 तक के नगर निगम चुनाव में राजेंद्र धारकर और नारायण राव धर्म की एक तरफा़ चलती थी। भले ही विधायक कोई भी हो, लेकिन उनके फैसले को कोई इनकार नहीं करता था। बाद में दौर बदला तो कृष्णमुरारी मोघे और सुमित्रा महाजन की एक तरफा़ चली। दोनों के यहां पर दावेदारों की लाइन लगी रहती थी। 2014 के चुनाव तक में दोनों नेताओं ने अपनी पसंद के प्रत्याशियों के वीटो करके टिकट दिलाए थे।
अब नजारा कुछ बदला-बदला हुआ है। दोनों नेताओं के यहां पर चुनाव लडऩे के इच्छुक नजर नहीं आ रहे हैं। शहर में दो ही नेताओं के यहां पर जबरदस्त भीड़ जुटी रही है। एक सांसद शंकर लालवानी तो दूसरे नगर भाजपा अध्यक्ष गौरव रणदिवे हैं। रणदिवे तो सुबह 10 बजे से दीनदयाल भवन पहुंच रहे हैं और कार्यकर्ताओं का बायोडाटा लेकर पक्ष सुन रहे हैं। इसके पीछे की गणित ये भी है कि कम से कम कार्यकर्ता को ये तो लगे कि उनका पक्ष संगठन ने सुना था। इधर, लालवानी के दो नंबर बंगले पर पहुंचने की खबर लगने पर दावेदारों का हुजूम इकट्ठा हो रहा है।
विधायक बना रहे हैं दूरी
दावेदारों को मालूम है कि पार्षद के टिकट में सबसे ज्यादा विधायकों की चलेंगी। उसके बाद नगर अध्यक्ष और सांसद की। इसलिए वे सबसे पहले घेराबंदी विधायकों की कर रहे हैं, लेकिन कई विधायक अपने पाले में आई गेंद को रणदिवे व लालवानी के पास भेज रहे हैं। साफ कहना है कि दोनों को देकर आओ। हम तो तुम्हारी मदद करेंगे ही।
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