रूसी हमलों के बीच भी यूक्रेन में पटरियों पर दौड़ रही हैं ट्रेनें, जानें कैसे कमांड सेंटर बन गया है रेलवे

कीव: रूस के हमलों से भारी तबाही मच रही है फिर भी यूक्रेन बचाव और जवाबी हमलों में जुटा है। रूस के सामने घुटने नहीं टेकने पड़े, इसके लिए ध्वस्त होती व्यवस्था का विकल्प निकाला जा रहा है। इसमें यूक्रेन का रेलवे इन्फ्रास्ट्रक्चर भी बहुत कारगर साबित हो रहा है। जब प्रमुख रेलवे स्टेशनों पर रूसी आक्रमणों से सेलफोन सर्विस सिस्टम बाधित हो गया है तब सोवियत काल के क्लोज्ड सर्किट फोन सिस्टम का सहारा लिया जाने लगा है। जमीन पर क्या-क्या चल रहा है, इसकी जानकारी के लिए दिन में दो बार इसी सिस्टम के सहारे मीटिंग होती है। टेर्नोपिल ट्रेन स्टेशन के पास यह मीटिंग सिर्फ 10 से 15 मिनट ही चलती है। यूक्रेनी सैनिकों को पता है कि यह सिस्टम रूस का मेन टार्गेट बन चुका है, इसलिए उसे ट्रेन से ही संचालित किया जा रहा है। ट्रेन का लोकेशन तुरंत-तुरंत बदलते रहने से रूस अब तक अपना शिकार नहीं बना सका है। रूसी हमलों के बीच बढ़ी चुनौती युद्ध शुरू होने के बाद से रेल सिस्टम ही यूक्रेन की जीवनरेखा बन गया है। रेलवे से जरूरी सामानों की आपूर्ति हो रही है और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है। यूक्रेनी रेलवे के मुताबिक, युद्ध छिड़ने के बाद से उसने अब तक 21 लाख यात्रियों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाया है। वहीं, करीब 2.5 लाख लोग पॉलेंड गए हैं। ट्रेन की कुछ बोगियों को नए ढंग-ढांचे में बदला गया है ताकि मोर्चों पर तैनात सैनिकों, घायलों और अस्पतालों तक दवाइयां पहुंचाई जा सकें। यूं बच-बचाकर चल रहीं ट्रेनें यूक्रेनी रेलवे सिस्टम में 2.31 लाख कर्मचारी हैं। उन्होंने राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की के बंकर से काम करने का ऑफर ठुकरा दिया है और वो ट्रेन में इधर-उधर घूमते ही अपने दायित्वों को अंजाम दे रहे हैं। उनका मकसद रूस के कदम बढ़ने से पहले ऐक्शन ले लेना होता है। वो अपनी पहचान छिपाने के लिए यात्रियों के बीच बैठ जाते हैं। ध्वस्त ट्रैकों और पुलों को ठीक करने की चुनौती रूस के हमलों में यूक्रेन में रेलवे के कई ट्रैक और पुल ध्वस्त हो चुके हैं जिन्हें रेलवे कर्मचारी बमबारी के बीच ठीक करने में जुटे हैं। कुछ हिस्से इस कदर बर्बाद हो चुके हैं जिन्हें ठीक नहीं किया जा सकता है। अब तक 33 रेल कर्मचारी मारे जा चुके हैं जबकि 24 घायल हो गए हैं। रेलवे का कुछ हिस्सा तो अब यूक्रेन के नियंत्रण से बाहर हो गया है। अधिकारियों-कर्मचारियों को फैसले लेने की छूट यूक्रेन में रेलवे अधिकारियों को अपनी समझ से फैसले लेने की छूट दे दी गई है और उन्हें अपने वरिष्ठ अधिकारियों के आदेश का इंतजार नहीं करना होता है। वो जरूरत पड़ने पर ट्रेनों का रूट बदल देते हैं और कई बार अन्य प्रमुख फैसले भी लेते हैं। चलती ट्रेन में नेटवर्क कवरेज बना रहे, यह बड़ा कठिन होता है। हालांकि, अमेरिकी उद्योगपति एलन मस्क के सैटलाइट इंटरनेट सिस्टम स्टारलिंक की सेवाएं उन्हें मिल रही हैं लेकिन रेलवे अधिकारी यह सर्विस तभी लेते हैं जब इसकी बहुत जरूरत हो। दरअसल, सैटलाइट के कारण ठिकाने का पता लगाना आसान होता है जिससे रूस के हमले का निशाना बनने की आशंका बढ़ जाती है।


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