ब्लॉगः अब तो मज़हब कोई ऐसा भी चलाया जाए, जिस में इंसान को इंसान बनाया जाए

हम जब छोटे थे तो बताया गया कि झंडे का केसरिया रंग त्याग और बलिदान का प्रतीक है। आगे चलकर देखा तो भगवा भी केसरिया की तरह लगा। लेकिन इसमें त्याग की सुगंध नहीं थी। बल्कि एक आभा थी जो कब्जा कर लेना चाहती थी दूसरों के हक, दूसरों की आवाज और दूसरों की सोच को। ये भगवा रंग गर्म था, दहकते सूरज जैसा, जैसे ये अपने सामने आने वाली हर चीज को जलाने के लिए आतुर हो। ये नारंगी रंग बलिदान लेना चाहता है, देना नहीं चाहता, न देश के लिए और न अपने परिवार के लिए।

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