संसद में आनंद शर्मा ने किया 1962 के वाजपेयी का जिक्र, पढ़ें नेहरू सरकार के खिलाफ कैसे आग उगलते थे अटल

संसद का बजट सत्र चल रहा है। लंबे अरसे बाद बिना शोर-शराबे के सदन की कार्यवाही चलते देखना सुखद है। राज्‍यसभा में सोमवार को राष्‍ट्रपति के अभिभाषण प्रस्‍ताव पर चर्चा हुई। हिमाचल प्रदेश से कांग्रेस के राज्यसभा सांसद आनंद शर्मा ने राष्‍ट्रीय सुरक्षा का मसला उठाते हुए चीन का जिक्र किया। फिर केंद्र सरकार को आइना दिखाते हुए 1962 के अटल बिहारी वाजपेयी का नाम लिया। शर्मा ने बताया कि तब कैसे चीन के साथ युद्ध को लेकर वाजपेयी ने जवाहरलाल नेहरू सरकार को घेरा था और संसद में मुद्दे पर चर्चा भी हुई थी। 1962 में वाजपेयी जनसंघ के युवा फायरब्रांड नेता थे और राज्‍यसभा में नेहरू सरकार की बखिया उधेड़ते थे। शर्मा ने वाजपेयी के जिन तल्‍ख तेवरों का जिक्र किया, उनकी पूरी कहानी आपको सुनाते हैं।

उधर चीन की सेना सीमा पर आगे बढ़ रही थी, इधर संसद के भीतर युवा अटल बिहारी वाजपेयी (Atal Bihari Vajpayee) तत्‍कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू (Jawaharlal Nehru) को घेर रहे थे। राज्‍यसभा में सोमवार को कांग्रेस के आनंद शर्मा ने 1962 युद्ध का जिक्र किया।


राज्‍यसभा में आनंद शर्मा ने किया 1962 के वाजपेयी का जिक्र, पढ़ें नेहरू सरकार के खिलाफ कैसे आग उगलते थे अटल

संसद का बजट सत्र चल रहा है। लंबे अरसे बाद बिना शोर-शराबे के सदन की कार्यवाही चलते देखना सुखद है। राज्‍यसभा में सोमवार को राष्‍ट्रपति के अभिभाषण प्रस्‍ताव पर चर्चा हुई। हिमाचल प्रदेश से कांग्रेस के राज्यसभा सांसद आनंद शर्मा ने राष्‍ट्रीय सुरक्षा का मसला उठाते हुए चीन का जिक्र किया। फिर केंद्र सरकार को आइना दिखाते हुए 1962 के अटल बिहारी वाजपेयी का नाम लिया। शर्मा ने बताया कि तब कैसे चीन के साथ युद्ध को लेकर वाजपेयी ने जवाहरलाल नेहरू सरकार को घेरा था और संसद में मुद्दे पर चर्चा भी हुई थी। 1962 में वाजपेयी जनसंघ के युवा फायरब्रांड नेता थे और राज्‍यसभा में नेहरू सरकार की बखिया उधेड़ते थे। शर्मा ने वाजपेयी के जिन तल्‍ख तेवरों का जिक्र किया, उनकी पूरी कहानी आपको सुनाते हैं।



'क्‍या हमें बताएंगे कि सरकार क्‍या कर रही है?'
'क्‍या हमें बताएंगे कि सरकार क्‍या कर रही है?'

वाजपेयी तब जनसंघ के युवा नेता के रूप में पहली बार सांसद बने थे। 1962 में जब चीन ने सीमा पर हलचल बढ़ाई तो संसद में धारदार चर्चाओं का सिलसिला शुरू हुआ। राज्‍यसभा के आर्काइव्‍स में तब की पूरी कार्यवाही दर्ज हैं। इन्‍हीं में से कुछ चुनिंदा चर्चाओं में वाजपेयी ने कैसे नेहरू सरकार से तीखे सवाल पूछे और उधर से क्‍या जवाब आए, पढ़‍िए।

23 अप्रैल, 1962


वाजपेयी सदन में सवाल करते हैं, '

क्‍या यह तथ्‍य नहीं है कि चीन ने बातचीत के दरवाजे बंद कर दिए हैं... जैसा कि चीनियों से मिले नोट्स से पता चलता है, और, अगर ऐसा है तो क्‍या हमें बताया जा सकता है कि सरकार इस समस्‍या को शांतिपूर्ण ढंग से सुलझाने के लिए क्‍या कर रही है?

'

नेहरू ने जवाब में कहा, '

मुझे खेद है कि मैं उन संभावित कदमों के बारे में ठीक से नहीं बता पाऊंगा जो भविष्‍य में लिए जा सकते हैं। वे (कदम) कई फैक्‍टर्स पर निर्भर करते हैं। हम यही कह सकते हैं कि इस मामले में हर कोशिश की जा रही है, हर विचार पर सोचा जा रहा है और जब भी मौका आएगा, उम्‍मीद है कि कुछ संभावित कदम उठाए जाएंगे। भले ही उसका असर कम या जो भी हो।

'



सीमा पर ताजा घुसपैठ के बाद अटल के तीखे सवाल
सीमा पर ताजा घुसपैठ के बाद अटल के तीखे सवाल

3 मई, 1962


वाजपेयी संसद में सवाल करते हैं, '

अगर दो या तीन चीनी आए तो वहां भारतीय क्षेत्र में 200 या 300 को घुसने से रोकने का क्‍या इंतजाम है?

'

जवाब में नेहरू कहते हैं, '

मैं मान रहा हूं कि अगर 200 आते हैं - ज्‍यादा भी आ सकते हैं - उनके आने की बात पता चल जाएगी। केवल एक या दो लोग, या तीन या चार लोग भी आसानी से इधर-उधर जा सकते हैं। सीमा पर हर गज की चेकिंग नहीं होती है। अगर कोई फोर्स आती है तो पता चलते ही उसका मुकाबला करते हैं।

'

वाजपेयी :

श्रीमान, बार-बार चीनी घुसपैठ हो रही है। क्‍या मैं जान सकता हूं कि इस दौरान कभी भी हमने सैन्‍य गतिविधि में हिस्‍सा लिया है?

नेहरू :

मुझे नहीं लगता कि हाल के महीनों में ऐसे मामले हुए हैं, शायद सालभर पहले, जब भारत और चीनी सैनिकों के बीच ऐसा कोई संघर्ष हुआ था।



जब संसद में सरकार ने मानी घुसपैठ की बात
जब संसद में सरकार ने मानी घुसपैठ की बात

20 जून, 1962


वाजपेयी :

क्‍या प्रधानमंत्री जी यह बताने का कष्‍ट करेंगे कि उत्‍तरी सीमाओं पर ताजा चीनी घुसपैठ हुई है और क्‍या इन घुसपैठों के संबंध में कोई बयान सदन के पटल पर रखा जाएगा?

लक्ष्‍मी मेनन (विदेश राज्‍य मंत्री) :

जी श्रीमान। सुमदो से 6 मील पश्चिम में चीनी पोस्‍ट की स्‍थापना को लेकर 15 अगस्‍त, 1962 के हमारे प्रोटेस्‍ट नोट के बाद, चीनी सैनिकों ने भारतीय क्षेत्र में स्‍पांग्‍गुर से करीब 10 मील दक्षिणपूर्व में एक और चौकी बना ली है। भारतीय क्षेत्र में बनाई गई इस चौकी को चीन ने 11 मई 1962 के नोट में स्‍वीकार किया है।



जब अटल ने भारतीय एयरस्‍पेस के उल्‍लंघन पर घेरा
जब अटल ने भारतीय एयरस्‍पेस के उल्‍लंघन पर घेरा

25 जून, 1962 : चीनी और पाकिस्‍तानी विमानों के भारतीय हवाई क्षेत्र का उल्‍लंघन करने पर

वाजपेयी :

क्‍या रक्षा मंत्री यह बताएंगे कि भारतीय वायु क्षेत्र के उल्‍लंघन की घटनाएं हाल में घटी हैं?

के रघुरमैया (रक्षा राज्‍य मंत्री) :

उल्‍लंघन को दिखाते बयान सदन के पटल पर रखे गए हैं।

वाजपेयी :

श्रीमान, बयान से ऐसा लगता है कि विदेशी ताकतों ने मनमर्जी से हमारे वायु क्षेत्र का उल्‍लंघन किया और वे हमारे क्षेत्र में 30 मील भीतर तक घुसने में गुरेज नहीं करते। क्‍या मैं जान सकता हूं कि प्रोटेस्‍ट नोट भेजने के अलावा सरकार वायु क्षेत्रों के उल्‍लंघन को रोकने के सरकार किन कदमों का प्रस्‍ताव देती है?

रघुरमैया :

जैसा कि प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री ने कई मौकों पर कहा है, हम सभ्‍य देशों की तरह व्‍यवहार कर रहे हैं और हमें आशा है कि उसका असर होगा।



जब संसद में टकराए नेहरू और वाजपेयी
जब संसद में टकराए नेहरू और वाजपेयी

सीमा पर हालात को लेकर प्रस्‍ताव


नेहरू :

नई बातें बहुत कम हैं जो मैं सदन के सामने रख सकता हूं... फायरिंग होने के आरोप और प्रत्‍यारोप लगाए गए हैं लेकिन अगर ऐसा कुछ हुआ भी तो यह काफी दूर हुआ और किसी को चोट नहीं आई। वर्तमान में हालात वैसे ही हैं जैसे थे और मैं नहीं कह सकता कि उनमें सुधार हुआ है, लेकिन निश्चित वह बिगड़े भी नहीं हैं। कुछ संकेत हैं - मैं नहीं जानता कि वे कितने सही हैं - कि सड़क के जरिए हमने जो टुकड़ी भेजी है वह, गलवान तक पहुंच सकती है। दूसरी ओर, उन्‍हें हवा के जरिए नियमित रूप से सप्‍लाई भेजी गई है और हमारी किसी सैन्‍य चौकी पर सप्‍लाई कम नहीं है।

हालात और खराब नहीं हुए हैं मगर खराब जरूर हैं, गंभीर हैं क्‍योंकि तथ्‍य यह है कि हमारे क्षेत्र का एक बड़ा हिस्‍सा चीनी कब्‍जे में है और जब तक ऐसा है तब तक हालात गंभीर ही रहेंगे। ...सवाल उठता है कि हम क्‍या करें। मैंने पहले ही कहा है कि हमारा अप्रोच दोहरा है। एक तो हम खुद को मजबूत कर रहे हैं और चीनियों को जितना दूर रख सकते हैं, रख रहे हैं और साथ ही साथ वे रास्‍ते भी तलाश रहे हैं कि इस कठिन समस्‍या का कोई शांतिपूर्ण हल निकल आए।

वाजपेयी :

श्रीमान, प्रस्‍ताव के अंत में मैं जोड़ना चाहूंगा, 'सदन का मत है कि सरकार की चीन नीति पूर्णतया असफल रही है। आठ साल पहले चीन ने भारत में घुसकर हमारी जमीन पर अक्‍साई चिन हाइवे बनाया, सरकार न तो चीन के कब्‍जे वाले क्षेत्र को छुड़ा सकी, न ही चीन के लगातार बढ़ते अतिक्रमण को रोक पा रही है... इससे ज्‍यादा दुख तो इस बात है कि सरकार अभी ऊहापोह में है और चीन के मकसद और नीयत को लेकर आत्‍मघाती भम्रों में है।



आज भी संसद में गूंजा वही मुद्दा
आज भी संसद में गूंजा वही मुद्दा

राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा में भाग लेते हुए कांग्रेस के राज्यसभा सांसद आनंद शर्मा ने कहा कि किसी ने चर्चा नहीं की कि भारत देश में कर्जा बढ़ गया है। डेबिट टु जीडीपी रेश्यो भारत में 90 पर्सेंट है भारत में। उन्होंने वित्त से मांग की कि वह इस बारे में सदन को बताएं। शर्मा ने आगे कहा कि आजादी के बाद जो बड़े संगठन और संस्थाएं बनी थीं, उनको बेचकर यह घाटा पूरा नहीं होगा। उन्हें बचाना होगा और आर्थिक विकास से यह कर्जा पूरा होगा।

शर्मा ने कहा, 'मुझे चिंता है, सदन को भी इस पर होनी चाहिए कि राष्ट्रपति के अभिभाषण में नैशनल सिक्यॉरिटी का कोई जिक्र नहीं है। लद्दाख से लेकर अरुणाचल तक... मैं भी एक सीमावर्ती राज्य में पैदा हुआ और वहीं से आता हूं। हमारी भी सीमा तिब्बत और चीन से लगती है। हमारे यहां से ही फौज जाती है। मनाली-लेह रोड से भारत की सेना जाती है। रोहतांग में अटल टनल बन गई, उससे थोड़ा फायदा हो गया, यह देश के लिए अच्छी बात है, इसके लिए बधाई है।'





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