सोल दक्षिण कोरिया ने पहली बार अत्याधुनिक किलर पनडुब्बी की मदद से समुद्र के नीचे से मिसाइल (SLBM) दागने में सफलता हासिल की है। यह पनडुब्बी एयर इंडिपेंडेंट पावर (AIP) से लैस है और दुश्मन को अपनी भनक दिए बिना कई दिनों तक समुद्र के जल में छिपी रह सकती है। गैर परमाणु ऊर्जा से चालित यह पनडुब्बी KSS-III स्टील्थ तकनीक से लैस है। दक्षिण कोरियाई पनडुब्बी की यह सफलता भारत के लिए भी अच्छी खबर है। दरअसल, चीन और पाकिस्तान की नापाक जोड़ी से निपटने के लिए भारत एआईपी तकनीक से लैस गैर परमाणु ऊर्जा चालित अत्याधुनिक पनडुब्बी की तलाश कर रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक दक्षिण कोरिया ने एआईपी तकनीक और परंपरागत बलिस्टिक मिसाइल से लैस पनडुब्बी का निर्माण करके दुनियाभर की नौसेनाओं के लिए एक नया दरवाजा खोला है। दक्षिण कोरिया ने यह पहले किया है लेकिन वह आखिरी देश नहीं होगा। उत्तर कोरिया से निपटने के लिए एसएलबीएम मिसाइल का परीक्षण बताया जा रहा है कि इस मिसाइल का केएसएस-3 सबमरीन से इसी महीने परीक्षण किया गया था लेकिन इसका ऐलान अब किया गया है। पनडुब्बी से ह्यूनमो 4-4 मिसाइल का परीक्षण किया गया। माना जा रहा है कि दक्षिण कोरिया ने अपने धुर विरोधी परमाणु हथियार संपन्न राष्ट्र उत्तर कोरिया से निपटने के लिए इस एसएलबीएम मिसाइल का परीक्षण किया है। उत्तर कोरिया इन दिनों लगातार लंबी दूरी तक मार करने वाली मिसाइलों का परीक्षण कर रहा है। दक्षिण कोरिया और उत्तर कोरिया दोनों के पास अपनी पनडुब्बी के लिए एसएलबीएम है लेकिन केएसएस-3 पनडुब्बी बिल्कुल नई है। इसकी तकनीक भी बेहद उन्नत है। इसे दक्षिण कोरिया ने खुद ही बनाया है। हालांकि इसके लिए उन्होंने कुछ तकनीकी मदद ब्रिटेन, जर्मनी और फ्रांस और स्पेन से ली है। इसके मुकाबले में उत्तर कोरियाई पनडुब्बी बहुत पुरानी है और केवल एक ही मिसाइल ट्यूब इसमें लगा है। यह पनडुब्बी गोरेई क्लास की है और बहुत शोर करती है जिससे उसके पकड़े जाने का खतरा रहता है। ब्रह्मोस और छोटी बलिस्टिक मिसाइलों को दागने में सक्षम दक्षिण कोरियाई पनडुब्बी में 6 मिसाइल ट्यूब लगी है। सूत्रों के मुताबिक भारत भी अपने P75I सबमरीन प्रोग्राम के लिए एक एआईपी से लैस पनडुब्बी की तलाश कर रहा है। दक्षिण कोरिया की KSS-III परंपरागत पनडुब्बी को अच्छा विकल्प माना जा रहा है जो न केवल ब्रह्मोस बल्कि छोटी बलिस्टिक मिसाइलों को दागने में सक्षम है।
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