काबुल पाकिस्तानी मदद और बंदूक के बल पर अफगानिस्तान पर कब्जा करने वाले तालिबानी आतंकवादियों ने अपनी अंतरिम सरकार का ऐलान कर दिया है। इसमें तालिबान ने अपने रहस्यमय नेता मुल्ला मोहम्मद हसन अखुंद को प्रधानमंत्री बनाया है। मुल्ला हसन क्वेटा शूरा का प्रमुख है जो तालिबान के हर बड़े फैसले को लेती है। वह तालिबान के संस्थापक मुल्ला उमर का राजनीतिक सलाहकार रह चुका है। मुल्ला हसन ने कभी अखबार नहीं पढ़ा है। तालिबानी प्रमुख के बारे में कई ऐसी बाते हैं जिससे अभी दुनिया अंजान है। आइए जानते हैं पूरा मामला... संयुक्त राष्ट्र के आतंकी सूची में शामिल मुल्ला हसन ने क्रूरता की सारी हदें पार करते हुए वर्ष 2001 में तालिबान की सरकार आने पर बामियान स्थित भगवान बुद्ध की मूर्तियों को नष्ट करने का आदेश दिया था। तालिबानी आतंकियों ने बुद्ध की विशाल मूर्तियों को तोप के गोलों से उड़ा दिया था। मुल्ला हसन ने इसे अपनी धार्मिक ड्यूटी करार दिया था। इस दौरान मुल्ला हसन तालिबान सरकार में डेप्युटी पीएम और विदेश मंत्री था। 'मैंने अखबार पर समय बर्बाद करने के बजाय कुरान पढ़ी' मुल्ला हसन भले ही अफगानिस्तान का पीएम बन गया है लेकिन अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की नजर में वह 'बेकार' रहा है। अमेरिका के एक लीक हुए खुफिया संदेश में कहा गया है कि मुल्ला हसन तालिबान के सबसे अप्रभावी और अयोग्य नेताओं में से एक है। अमेरिका ने यह भी कहा कि मुल्ला हसन का मूड लगातार बदलता रहता है और उसके साथ काम करना आसान नहीं है। विदेश मंत्री होने के बाद भी उसने एक इंटरव्यू में कहा था, 'मैंने अपने पूरे जीवन में अखबार की एक खबर नहीं पढ़ी। मैंने अखबार पर अपना समय बर्बाद करने के बजाय कुरान पढ़ी।' यही नहीं मुल्ला हसन अखबारों को जमीन पर गिरा देखकर खफा हो जाता था और एक बार तो उसने मुल्ला उमर से बात करके अखबारों पर बैन लगाने की इच्छा जताई थी। मुल्ला हसन ने कहा था कि अखबार में शब्द छपे होते हैं और उसको जमीन पर गिराना एक तरह से कुरान का अपमान है क्योंकि कुरान में भी शब्द छपे हुए हैं। उसने कहा था कि चूंकि ज्यादातर अफगान लोग अशिक्षित हैं, ऐसे में वाइस ऑफ शरिया रेडियो अपने आप में पर्याप्त है। लो प्रोफाइल रहता है मुल्ला हसन, पाकिस्तान का करीबी बताया जा रहा है कि मुल्ला हसन करीब 20 साल से शेख हैबतुल्ला अखुंजादा के करीबी रहे हैं और इसी वफादारी का इनाम उन्हें मिला है। हैबतुल्ला अखुंजादा ईरान की तरह से अफगानिस्तान का सुप्रीम लीडर बनने जा रहा है। विश्लेषकों के मुताबिक मुल्ला हसन के पक्ष में एक और बात जो गई वह है, उनका लो प्रोफाइल और पाकिस्तान का करीबी होना था। काबुल पहुंचे आईएसआई चीफ ने मुल्ला हसन के पक्ष में पूरी ताकत लगा दी और उनके विरोधी मुल्ला बरादर किनारे लग गए।
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