पहली बार दिखीं सौर मंडल के सबसे रस्यमय ऐस्टरॉइड की साफ तस्वीरें, कुत्तों के 'फेवरिट लंच' जैसा

कैलिफोर्निया हमारे ब्रह्मांड में कई अजीबोगरीब चीजें देखने को मिलती हैं लेकिन हाल ही में कुछ ऐसा देखा गया है जिससे इंसान ही नहीं कुत्ते भी उत्साहित हो जाएंगे। दरअसल, वैज्ञानिकों को ‘डॉग बोन’ के आकार का एक ऐस्टरॉइड दिखा है जिसके दो चांद भी हैं। इस खोज के साथ दिलचस्प सवाल यह खड़ा हो गया है कि आखिर ये तीनों साथ आए कैसे? 1880 में खोज ऐस्ट्रॉनमर्स ने 1880 में मंगल और बृहस्पति की कक्षाओं के बीच ऐस्टरॉइड बेल्ट में ऐस्टरॉइड Kleopatra की खोज की थी लेकिन पिछले कुछ दशक में यह पता चला है कि इसका आकार कुछ अलग है और इसके दो चांद भी हैं। वैज्ञानिक ने चिली में स्थित वेरी लार्ज टेलिस्कोप की मदद से इसे देखते रहे। इस पर नई रिसर्च करने वाले फ्रैंक मार्चिस ने बताया है कि यह हमारे सौर मंडल में अनोखा ऑब्जेक्ट है। फ्रैंक कैलिफोर्निया में SETI इंस्टिट्यूट में ऐस्ट्रॉनमर हैं। उनका मानना है कि Kleopatra की मदद से सौर मंडल के बारे में और जानकारी जुटाने में मदद मिलेगी। मिलती गईं नई जानकारियां साल 2008 में मार्चिस और उनके साथियों ने Kleopatra के दोनों चांद देखे थे। इन्हें मिस्र की मशहूर महारानी Kleopatra के बच्चों के नाम पर AlexHelios और CleoSelene नाम दिया गया है। इसके बाद वैज्ञानिकों ने इस पर नजर बरकरार रखी और साल 2017-2019 के बीच और नई जानकारियां मिलीं। दिखीं साफ तस्वी रें Very Large Telescope के Spectro-Polarimetric High-contrast Exoplanet Research (SPHERE) इंस्ट्रुमेंट की मदद से नया डेटा मिला। SPHERE धरती से करीब 20 करोड़ मील दूर स्थित Kleopatra और उसके चांद साफ-साफ देख सकता है। इसमें हाई-पावर अडैप्टिव ऑप्टिक्स सिस्टम भी लगा है जो धरती के वायुमंडल के कारण धुंधलाने वाली तस्वीरों को साफ कर सकता है। पहले के मॉडल फेल रिसर्चर्स ने इसकी मदद से Kleopatra की तस्वीरें लीं और इसमें देखा गया कि कैसे दोनों चांद इसके चक्कर काटते हैं। इससे यह भी पता चला कि पहले मॉडल सही नहीं थे। वैज्ञानिक किसी ऑब्जेक्ट और उसके चांद के बीच के रिलेशन की मदद से ग्रैविटी और द्रव्यमान को समझते हैं। कक्षा समझने में गलती से कई बातें गलत निकल सकती हैं। असल में द्रव्यमान काफी कम नए डेटा की मदद से वैज्ञानिकों ने पाया कि Kleopatra का द्रव्यमान पहले के आकलन की तुलना में 35% कम है। इससे इसके आकार के बारे में सटीक जानकारी मिलती है। यह ज्यादा घना नहीं है। हालांकि, वैज्ञानिकों का मानना है कि यह धातु से बना हो सकता है। हो सकता है कि चट्टानों के बीच काफी खाली जगह हो। इसके चांद कैसे बने? वैज्ञानिकों ने पाया इसके चांद भी इसी से बने हैं। दरअसल, Kleopatra इतनी तेजी से घूम रहा है कि यह हिस्से बाहर की ओर फेंकता है। रिसर्चर्स के मुताबिक मलबे के साथ टक्कर से इतना मटीरियल बाहर निकल जाएगा कि आपस में मिलकर वह चांद में तब्दील हो जाए। यह भी हो सकता है कि और चांद इसके चक्कर काट रहे हों। इसके लिए ESO के जैसे इंस्ट्रुमेंट्स का इंतजार है जो इस दशक के आखिर तक लॉन्च हो सकता है।


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