इस्लामाबाद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इन दिनों हर बात में चीन का पक्ष लेते दिखाई दे रहे हैं। इमरान का चीन प्रेम इतना बढ़ गया है कि वे खुलेआम अमेरिका की बेइज्जती तक कर रहे हैं। कुछ दिनों पहले उन्होंने पाकिस्तान में अमेरिका को एयरबेस दिए जाने के सवाल पर 'बिलकुल नहीं' बोलकर बवाल खड़ा कर दिया था। अब ने से दो टूक कहा है कि उन्हें अमेरिका के साथ भी अच्छे संबंध बनाने चाहिए। पाक सेना प्रमुख और आईएसआई चीफ ने की वकालत हाल में ही पाकिस्तानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा पर गठित संसदीय समिति के सामने पेश होते हुए पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल और आईएसआई चीफ लेफ्टिनेंट जनरल फैज हामिद ने अमेरिका के साथ स्वस्थ संबंधों की वकालत की। इस बैठक में शामिल कुछ सांसदों ने बताया कि सैन्य और खुफिया नेतृत्व ने इस बात पर जोर दिया कि चीन के साथ संबंध मजबूत हैं और बलिदान नहीं किया जा सकता है। इसके साथ ही पाकिस्तान को अमेरिका के साथ एक स्वस्थ संबंध बनाए रखना होगा। पाकिस्तान की रणनीतिक चुनौतियों के बारे में बताया गुरुवार को आयोजित यह बैठक देर रात तक चलती रही। इस बैठक में अफगानिस्तान से अमेरिका की वापसी के बाद बनती स्थिति, जम्मू-कश्मीर के घटनाक्रम, चीन और अमेरिका के साथ संबंधों पर सेना और आईएसआई ने अपना पक्ष रखा। दोनों ही निकायों ने देश के सामने आने वाली रणनीतिक चुनौतियों और आंतरिक सुरक्षा की स्थिति पर भी सांसदों को जानकारी दी। भारत-अमेरिका के संबंधों पर जताई गई चिंता इस बैठक में भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते रणनीतिक संबंधों पर चिंता भी जताई गई। पाकिस्तानी सेना प्रमुख ने कहा कि भारत कई द्विपक्षीय और बहुपक्षीय व्यवस्थाओं के माध्यम से अमेरिका के साथ अपने संबंधों को मजबूत कर रहा है। जनरल बाजवा ने इसलिए ही पाकिस्तान को अमेरिका के साथ स्वस्थ्य संबंध बनाए रखने के लिए कहा। अफगानिस्तान से अमेरिकी सेना की वापसी को लेकर भी पाकिस्तान चिंतित है। पाकिस्तानी सेना ने बताया कि उसका तालिबान पर प्रभाव सीमित है। आर्मी चीफ ने पाकिस्तान के दुर्दिनों के बारे में किया आगाह इस बैठक में नेताओं को यह भी बताया गया कि बाहरी ताकतें देश में अपना प्रभाव बढ़ा रही हैं। बलूचिस्तान में आतंकवाद में वृद्धि और पिछले हफ्ते लाहौर में हुए हमले इसी का परिणाम है। आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष पाकिस्तान पर दबाव बढ़ा सकता है। इसके अलावा चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) परियोजनाओं को लक्षित करने के प्रयास भी किए जा सकते हैं। आगे यह भी आशंका जताई गई कि पाकिस्तान से विदेशी निवेशकों को डराने की कोशिश हो सकती है।
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