ब्लॉगः दूसरी बार संसद भंग होने के बाद नेपाल में राजनीतिक संकट और गहराया

वर्तमान नेपाल भयंकर अस्थिरता के दौर में प्रवेश कर गया है। यों तो पिछले एक-डेढ़ दशक में नेपाल की कोई भी सरकार अपनी अवधि पूरी नहीं कर सकी, लेकिन के.पी. शर्मा ओली की सरकार ने जैसे और जितने गोते खाए हैं, किसी प्रधानमंत्री की सरकार ने नहीं खाए। फिलहाल नेपाल की राष्ट्रपति विद्यादेवी भंडारी ने ओली मंत्रिमंडल की सिफारिश पर संसद को भंग कर दिया है और नवंबर में नए चुनावों की घोषणा कर दी है। इस घोषणा के बाद नेपाल के सभी राजनीतिक दलों को चुनाव की तैयारी में लग जाना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अब सभी विरोधी दल संसद को भंग करने का विरोध कर रहे हैं। इसे वे राष्ट्रपति का असंवैधानिक कदम बता रहे हैं। वे नेपाल के सर्वोच्च न्यायालय से कह रहे हैं कि वह संसद को पुनर्जीवित करे।

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