23 की शहादत: वे घाव बांध लड़ते रहे, खाली झोपड़ियों में गए, तो वहां भी बिछा था जाल

नई दिल्‍ली छत्‍तीसगढ़ के जंगल शनिवार को फिर गोलियों की तड़तड़ाहट से गूंज उठे। घात लगाकर किए गए हमले में 23 सुरक्षाकर्मी शहीद हो गए। जो जानकारी सामने आई है, उसके मुताबिक नक्‍सलियों ने पूरी योजना के साथ सुरक्षा बलों पर हमला किया। सीआरपीएफ, कोबरा, एसटीएफ और डीआरजी के दो हजार से ज्‍यादा जवान एक नक्‍सली कमांडर की इलाके में मौजूदगी की सूचना पर सर्च ऑपरेशन करने गए थे। वापसी में टेकलगुड़ा गांव से थोड़ी दूर पर अचानक गोलियां चलने लगीं। कैसे किया गया हमला?टेकलगुड़ा गांव के एक तरफ पहाड़ और तीन तरफ जंगल है। यह इलाका नक्‍सलियों की बटालियन 1 का है जिसका मुखिया कमांडर माडवी हिड़मा है। उसके यहां मौजूद होने की भनक मिली थी। सूचना पर भारी संख्‍या में जॉइंट फोर्स के जवान भेजे गए। शनिवार को दोपहर जब सर्च टीमें लौट रही थीं तो टेकलगुड़ा गांव से करीब 100 मीटर दूर अचानक फायरिंग शुरू हो गई। जवान जबतक कुछ समझ पाते, तबतक पहाड़‍ी की ओर से भी गोलियां आने लगीं। नक्‍सलियों के जाल में फंस गए जवानहर तरफ नक्‍सली मौजूद थे, जवान बीच में खुले स्‍थान पर थे। गांववालों के मुताबिक, नक्‍सलियों ने एक पहाड़ी पर फायरिंग पोजिशन तैयार की थी। स्‍थानीय अखबार नई दुनिया के मुताबिक, पहली गोली गांव से चली थी। अमूमन सुरक्षा बल गांवों की तरफ अंधाधुंध फायरिंग नहीं करते इसलिए असमंजस में रह गए। तबतक पहाड़ी से गोलियां चलने लगीं। जवानों ने उधर जवाबी फायरिंग शुरू की और गांव टेकलगुड़ा की तरफ जाने लगे। अपने घायल साथियों को लेकर कुछ जवान टेकलगुड़ा गांव में पहुंचे जो कि नक्‍सलियों की एक चाल निकली। उन्‍होंने पूरा गांव खाली करा लिया था। झोपड़‍ियों में गांववालों की जगह नक्‍सली मौजूद थे। जैसे ही सुरक्षाकर्मी वहां पहुंचे, नक्‍सलियों ने हमला बोल दिया। वहां एलएमजी, रॉकेट लॉन्‍चर जैसे हथियार जुटाए गए थे। मौके पर पहुंचे स्‍थानीय लोगों ने पुलिस को बताया कि करीब एक किलोमीटर के दायरे में खून से लथपथ जवानों के शव पड़े हुए थे। तीन तरफ से हमला हुआ, खुद मरहम-पट्टी करते रहे जवानशनिवार को करीब छह घंटे तक तीन जगहों पर मुठभेड़ चली। करीब एक किलोमीटर के दायरे में U शेप के फॉर्मेशन में नक्‍सलियों ने मोर्चा संभाल रखा था। एक तरफ पहाड़ी, दूसरी तरफ गांव और कुछ देर बाद पीछे से भी फायरिंग होने लगी। नक्‍सलियों ने कैंची बम, बीजीएल, यूजीएल जैसे हथियारों का इस्‍तेमाल किया। गांव के पास से खून के धब्‍बों के अलावा इंजेक्‍शन, सीरिंज व अन्‍य दवाइयां मिली हैं। मुठभेड़ के दौरान, जवान अपने घायल साथियों की मरहम-पट्टी भी करते रहे। नई दुनिया के अनुसार, करीब एक किलोमीटर के दायरे में लगे हर पेड़ के तने में गोलियों के निशान मिले हैं। जवान इन्‍हीं पेड़ों की ओट लेकर नक्‍सलियों का मुकाबला करते रहे। शाम होते-होते जवानों ने फायरिंग रोकी और कैंप की तरफ चले गए। नक्‍सली रातभर गांव और आसपास मंडराते रहे। गोलियां बरसाईं, लूटपाट भी करते गए नक्‍सलीआईजी बस्‍तर सुंदरराज पी के अनुसार, नक्‍सलियों ने शहीद जवानों की वर्दी, जूते व अन्‍य हथियार लूट लिया। उन्‍होंने बताया कि 7 एके-47 राइफल, दो इंसास राइफल और एक एलएमजी लूटी गई है। एक महिला नक्‍सली का शव इंसास राइफल के साथ मिला जिसकी पहचान माडवी वनोजा के रूप में हुई जिसे पामेड़ एलजीएस कमांडर बताया जा रहा है। प्रेशर बम के चलते रस्सियों से खींचे गए शवटेकलगुड़ा गांव को नक्‍सलियों का गढ़ माना जाता है। वायुसेना के हेलिकॉप्‍टर्स की मदद से शहीद जवानों के शवों को बाहर निकाला गया। नई दुनिया अखबार ने मौके से अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि गांव लाशों से पट गया था। शनिवार को यहां पहली बार वायुसेना के हेलिकॉप्‍टर उतरे। शवों के पैर में लंबी रस्‍सी बांधी गई और दूसरे छोर से उन्‍हें खींचा गया। ऐसा इसलिए क्‍योंकि नक्‍सली अक्‍सर शवों के नीचे बम लगा देते हैं। इसके बाद पूरे सम्‍मान के साथ शहीदों के शव विमान में रखवाए गए। बस्‍तर में नक्‍सलियों का खूनी खेलबस्‍तर के इलाके में नक्‍सलियों ने खूब खून बहाया है। शनिवार के हमले में कुल 23 जवान शहीद हुए हैं जबकि 33 घायल हैं। इससे पहले,
  • 23 मार्च, 2021 को माओवादियों ने नारायणपुर में एक बस को उड़ा दिया। 5 पुलिसकर्मी शहीद हुए, 13 घायल।
  • 21 मार्च, 2021 को सुकमा में हुई मुठभेड़ में 17 जवान शहीद हुए।
  • 9 अप्रैल, 2019 को दंतेवाड़ा में एक आईईडी ब्‍लास्‍ट में बीजेपी विधायक भीमा मंडावी और चार सुरक्षाकर्मी मारे गए।
  • 24 अप्रैल, 2017 को सुकमा में हुई मुठभेड़ में CRPF के 27 जवान शहीद हुए।
  • मार्च 2017 में सुकमा में हुई मुठभेड़ में CRPF के 12 जवान शहीद हुए।
  • 25 मई, 2013 में नक्‍सलियों ने कांग्रेस के कुछ नेताओं और सुरक्षा बलों समेत कुल 30 लोगों को मौत के घाट उतार दिया था।
  • 29 जून, 2010 को नारायणपुर में CRPF के 27 जवान शहीद हुए।
  • 17 मई, 2010 को दंतेवाड़ा से सुकमा जा रही बस को नक्‍सलियों ने उड़ा दिया। इसमें कुल 36 लोग मारे गए जिनमें 12 स्‍पेशल पुलिस अधिकारी थे।
  • 6 अप्रैल, 2010 को एक मुठभेड़ में CPRF के 75 जवान और एक पुलिसकर्मी शहीद हुए।
गृहमंत्री के कार्यक्रम रद्द, सीएम बोले- नक्‍सलियों की आखिरी लड़ाईसुरक्षा बलों पर हमले की जानकारी मिलने के बाद, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने असम के चुनावी कार्यक्रम रद्द कर दिए हैं। उन्‍होंने उच्चाधिकारियों संग बैठक में नक्‍सलियों के खिलाफ नए ऑपरेशन पर चर्चा की। शाह ने कहा कि लड़ाई अधिक मजबूती, सटीकता और तीव्रता से जारी रहेगी। छत्‍तीगसढ़ सीएम भूपेश बघेल ने कहा कि 'यह मुठभेड़ नहीं, बल्कि युद्ध है। यह नक्‍सलियों के लिए अंतिम लड़ाई साबित होगी।' सीएम ने अस्‍पताल जाकर घायलों से भी मुलाकात की।


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