सूर्योदय से पहले अंतरिक्ष से धरती पर आ रहा रहस्‍यमय प्रकाश, NASA ने बताया सच!

वॉशिंगटन सूर्योदय से ठीक पहले धरती के ऊपर दिखने वाले चमकीले रहस्‍यमय प्रकाश के बारे में अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने बड़ी जानकारी दी है। नासा ने कहा कि मंगल ग्रह से आ रही धूल के कण का परिणाम हो सकता है। नासा ने अपने जूनो प्रोब के अध्‍ययन के आधार पर यह जानकारी दी है। जोडाइअकल लाइट क्षितिज से निकलता हुआ हल्‍का प्रकाश स्‍तंभ होता है। सूरज के चारों ओर कक्षा में मौजूद धूल के कणों पर पड़ने वाले प्रकाश के पृथ्‍वी की ओर परावर्तित होने से जोडाइअकल लाइट स्‍तंभ बनता है जो देखने में बहुत सुंदर लगता है। नासा के जूनो प्रोब को वर्ष 2011 में लॉन्‍च किया गया था और बृहस्‍पति ग्रह की यात्रा के दौरान मंगल ग्रह के पास इसे धूल के कण मिले थे जो उससे बहुत तेजी से टकरा गए थे। मंगल ग्रह सबसे धूल भरे ग्रहों में से एक जूनो के साथ हुई इस टक्‍कर ने धूल के विकास और उसके परिक्रमा पथ के बारे में नासा को अद्भुत जानकारी मिली। इसी से जोडाइअकल लाइट के आने के रहस्‍य का भी अब खुलासा हुआ है। जूनो के वैज्ञानिकों का दावा है कि मंगल ग्रह इस मलबे के लिए ज‍िम्‍मेदार है क्‍योंकि ये धूल के कण अंतरिक्ष में एक विशेष बिन्‍दू पर सूरज के चारों ओर एक कक्षा में चक्‍कर लगा रहे हैं जो कुछ उसी तरह से है जैसे मंगल की कक्षा में होता है। सोलर सिस्‍टम में मंगल ग्रह सबसे धूल भरे ग्रहों में से एक है। हालांकि नासा के वैज्ञानिक अभी यह नहीं बता सकें हैं कि मंगल ग्रह के गुरुत्‍वाकर्षण से कितनी ज्‍यादा धूल बच निकली है। उन्‍होंने कहा कि यह तब होता है जब मंगल ग्रह पर धूलभरी आंधी चलती है और पूरे ग्रह को अपनी चपेट में ले लेती है। नासा ने कहा कि इसी धूल के कणों की वजह से सूर्योदय के ठीक पहले या सूर्यास्‍त के ठीक बाद क्षितिज से एक प्रकाश स्‍तंभ नजर आता है। इससे पहले यह माना जाता था कि यह धूल सोलर सिस्‍टम भीतरी इलाके में चक्‍कर काटने वाले ऐस्‍टरॉइड या धूमकेतु की वजह से आता है।


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