इंदौर. मप्र लोक सेवा आयोग (mp psc) की राज्य सेवा प्रारंभिक परीक्षा में आरक्षित वर्ग वालों को मेरिट से चुनकर आरक्षित वर्ग का कोटा प्रभावित करने को लेकर लगी याचिका में अगली सुनवाई 12 फरवरी को होगी। याचिकाकर्ता की ओर से कोर्ट में गुहार लगाई गई है कि याचिका के निराकरण में समय लगेगा इसलिए इस बीच होने वाली मुख्य (mains) परीक्षा में बैठने की अनुमति मिलना चाहिए। कोर्ट ने इससे इंकार कर दिया है। ये याचिका स्वीकृत होती है तो अन्य उम्मीदवारों को भी लाभ मिलेगा।
इस याचिका पर सोमवार को पीएससी ने जवाब पेश करना था लेकिन, पीएससी की ओर से कोई जवाब नहीं आया। मालूम हो, पीएससी का रिजल्ट जारी होने के साथ ही विवादों में है। प्रारंभिक परीक्षा में याचिकाकर्ता किशोर चौधरी ने 144 अंक हासिल किए हैं जबकि अनारक्षित वर्ग का कटऑफ 146 है। 146 और इससे अधिक अंक लाने वाले अनारक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को भी आरक्षित वर्ग में रखा गया है। आरक्षण के संशोधित नियम 17 फरवरी 2020 से लागू किए गए हैं, इस नतीजे में ये नियम भूतलक्ष्यी प्रभाव से लागू करने की बात कही जा रही है।
इससे पहले मप्र हाईकोर्ट में पीएससी परीक्षा 2019 की प्रारंभिक परीक्षा के रिजल्ट, परीक्षा नियम तथा आरक्षण अधिनियम को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई टल गई। चीफ जस्टिस मोहम्मद रफीक व जस्टिस विजय कुमार शुक्ला की डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार व पीएससी को जवाब पेश करने के लिए अंतिम अवसर दिया।
अपाक्स सहित 6 अन्य की ओर से दायर याचिकाओं में कहा गया कि पीएससी परीक्षा के प्रारंभिक परिणामों में गलत तरीके से आरक्षण के प्रावधान लागू किए गए हैं। याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता संतोष पॉल, रामेश्वर सिंह ठाकुर और विनायक शाह ने तर्क दिया कि पीएससी परीक्षा के परिणाम में 40 प्रतिशत पद सामान्य वर्ग के लिए आरक्षित कर दिए गए। 73 प्रतिशत आरक्षण ओबीसी, एससी, एसटी और ईडब्ल्यूएस के लिए कर दिया गया है। इससे 113 प्रतिशत आरक्षण लागू कर दिया गया है।
from Patrika : India's Leading Hindi News Portal https://ift.tt/3q2uhPr