आर्मी चीफ ने सैन्य आधुनिकीकरण की गति पर जताई चिंता, जानें हमारी सेना के पास क्या-क्या कमी

नई दिल्ली भारतीय सेना के तीनों अंगों- जल सेना, थल सेना और वायु सेना के आधुनिकीकरण की जरूरत बहुत लंबे समय से महसूस की जा रही है। इनके पास जवानों, कर्मचारियों और अफसरों से लेकर साजो-सामान तक की कमी है। हालांकि, नरेंद्र मोदी सरकार ने सैन्य आधुनिकीकरण की दिशा में कदम उठाया है। इसके तहत सरकार ने रक्षा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की सीमा बढ़ाकर अब 100% कर दी है। आर्मी चीफ की चिंता लेकिन, आर्मी चीफ का कहना है कि हमारे दुश्मन सैन्य आधुनिकीकरण की दिशा में जिस तेजी से बढ़ रहे हैं उतनी तेजी से हम नहीं बढ़ रहे। गुरुवार को 'आर्मी- इंडस्ट्री पार्टिनरशिप के 25 साल' के वेबिनार में आर्मी चीफ ने कहा कि भारतीय आर्म्ड फोर्स की विदेशी उपकरणों पर निर्भरता को स्वदेशी क्षमता बढ़ाकर कम करना चाहिए। उल्लेखनीय है कि केंद्रीय कैबिनेट ने हाल ही में एयरफोर्स के लिए हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) से 83 हल्के युद्धक विमान खरीदने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। ये 83 तेजस विमान पूर्णतः स्वदेशी हैं जो निश्चित रूप से भारतीय वायुसेना की क्षमता बढ़ाएंगे। चीन के साथ तनाव के बीच आई थी चिंताजनक खबर ध्यान रहे कि पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर चीन के साथ तनाव के बीच पिछले वर्ष जून महीने में खबर आई थी कि भारतीय सेना को 45 जरूरी साजो-सामान की कमी हो गई है। इस लिस्ट में कई तरह के गोला-बारूद, लद्दाख जैसे ठंडे इलाकों में रहने के लिए गर्म कपड़े और पैराशूट शामिल थे। तब सेना ने डिपार्टमेंट ऑफ डिफेंस प्रॉडक्शन (डीडीपी) के जरिए ऑर्डनेंस फैक्ट्री बोर्ड (ओएफबी) से इन जरूरी सामानों की सप्लाई सुनिश्चित करने की मांग की थी। हमारे सहयोगी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया ने डीडीपी के दस्तावेजों की पड़ताल में पाया था कि इन जरूरी चीजों में से 20 गोला-बारूद से जुड़ी थीं। दूसरी 21 चीजों में कॉम्बैट ड्रेस, कोट ईसीसी (भीषण ठंड के लिए जरूरी कोट), पॉन्चो (कंबल जैसा लबादा) और ग्लेशियर के लिए कैप, सप्लाई गिराने वाले उपकरण और पैराशूट शामिल थे। इसके साथ ही डीडीपी ने तीन आर्टिलरी गन की सप्लाई में कमी का संकेत दिया था। इस तरह की 167 गन भी ओएफबी के पास नहीं पहुंची थी। इसके अलावा 196 माइन प्रटेक्टेड (बारूद रोधी) गाड़ियों की सप्लाई भी नहीं हुई थी। पिछले साल संसद में मुद्दा उठा तो पता चला कि भारतीय सेना में जवानों और अधिकारियों भी कमी है। थल सेना (Indian Army) में 45 हजार से अधिक सैनिकों की कमी है। इनमें लेफ्टिनेंट रैंक से ऊपर के 7,000 अधिकारियों की भर्ती की भी दरकार है। 42 को मंजूरी लेकिन सिर्फ 33 स्क्वैड्रन वायुसेना के पास 33 फाइटर एयरक्राफ्ट स्क्वैड्रन हैं। हर स्क्वैड्रन में 16 एयरक्राफ्ट और दो-दो सीटों वाले दो ट्रेनर एयरक्राफ्ट होते हैं। यानी, भारतीय वायुसेना के पास 500 से ज्यादा युद्धक विमान हैं। यह आंकड़ा सुनने में तो ठीक लगता है लेकिन चीन और पाकिस्तान जैसे पड़ोसियों से पैदा हुई चुनौतियों के लिहाज से ये पर्याप्त मालूम नहीं पड़ते। भारतीय वायुसेना के लिए कुल 42 स्क्वैड्रन कपैसिटी मंजूर की गई है। इस लिहाज से देखें तो उसके पास अब भी 9 स्क्वैड्रन की कमी है। स्वाभाविक है कि इसी कमी को पूरा करने के लिए 83 तेजस विमान खरीदने का फैसला किया गया। आधुनिकीकरण की दिशा में बढ़े कदम, लेकिन... भारतीय वायुसेना को युद्धक विमानों के अलावा अटैक हेलिकॉप्टरों, AWACS प्लैटफॉर्म, हवा में ईंधन भरने वाले विमानों की भी दरकार है। अभी भारतीय वायुसेना के बेड़े में मिग-21 BIS, जगुआर, मिराज 2000, मिग-29, सुखोई-30 MKI और कुछ तेजस विमान हैं जिन्हें 2018 में बेड़े में शामिल किया गया था। इनके अलावा, वायुसेना में साल 2004 से ब्रिटेन के ट्रेनर एयरक्राफ्ट हॉक भी शामिल हैं। वहीं, रूस निर्मित छह आईएल-78 टैंकर भी भारतीय वायुसेना के पास हैं, लेकिन अभी ऐसे 6 और टैंकरों की कमी है। इतना ही नहीं, भारतीय सेना को मानवरहित विमानों (UAV), अटैक हेलिकॉप्टरों आदि की भी कमी है। वायुसेना के पास अमेरिकी अपाचे हेलिकॉप्टर तो हैं, सोवियत जमाने के एमआई 25/35 और HAL निर्मित स्वदेशी अडवांस्ड लाइट हेलिकॉप्टर भी हैं। जहां तक बात युद्धक विमानों की है तो 83 तेजस एयरक्राफ्ट की खरीद को मंजूरी देने से पहले फ्रांस से पांच राफेल विमान आ चुके हैं। वहीं, रूस से एस-400 मिसाइल सिस्टम की डील पर मुहर लग चुकी है। फ्रांस का ऑफर उधर, फ्रांस ने भारत को एयरबस 330 मल्टि-रोल ट्रांसपोर्ट टैंकर एयरक्राफ्ट बेचने का प्रस्ताव रखा है। एयरबस 330 उड़ान के वक्त हवा में ईंधन भरने का काम करता है। इस मिड एयर रीफ्यूलर टैंकर से भारतीय वायुसेना की मारक क्षमता बढ़ सकती है। रिपोर्ट में रक्षा सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि भारतीय वायुसेना एक ब्रिटिश कंपनी से वेट लीज पर एक Airbus 330 MRTT लेना चाहती थी, इस बीच फ्रांस की तरफ से यह प्रस्ताव आ गया। फ्रांस का ऑफर है कि भारत को बहुत सस्ती कीमत पर छह एयरक्राफ्ट दिए जाएंगे जिसका 30 सालों तक रखरखाव की जिम्मेदारी उसकी होगी। ये एयरक्राफ्ट 5-7 साल पुरानी हैं।


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