पेइचिंग भारत ने गलवान घाटी के शहीदों को वीरता का पुरस्कार दिया तो चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स को मिर्ची लगी है। ग्लोबल टाइम्स के मुताबिक चीनी एक्सपर्ट्स ने भारत पर तनाव बढ़ाने का आरोप लगाया है। यही नहीं, भारत का गलवान के शहीदों को सम्मानित करने का फैसला भी अखबार को नागवार गुजरा है। बीते साल जून में पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में दोनों देशों की सेनाओं के बीच हिंसक झड़प में भारत के 20 सैनिक शहीद हो गए थे जबकि चीन ने कभी अपनी सेना के हताहतों का जिक्र नहीं किया। 'भारत उठा रहा उकसावे का कदम' ग्लोबल टाइम्स की रिपोर्ट में चीनी एक्सपर्ट्स के हवाले से कहा गया है कि दोनों देशों के बीच 9वें राउंड की बैठक में सकारात्मक संकेत देखने को मिले। चीन के प्रॉपगैंडा अखबार ने लिखा है, 'चीन सब शांत करने के लिए संकेत भेज रहा है जबकि भारत लगातार उकसावे भरे कदम उठा रहा है जिससे दुनिया और चीन के लोगों को इशारा मिलता है कि सीमा विवाद सुलझाना और शांति-स्थिरता कायम करना उनका मकसद नहीं है।' 'ध्यान भटका रही सरकार' यही नहीं, अखबार ने सिक्किम में दोनों सेनाओं के बीच हुई झड़प को भी फर्जी बताया है। सेंटर फॉर एशिया-पैसिफिक स्टडीज के शंघाई इंस्टिट्यूट फॉर इंटरनैशनल स्टडीज के डायरेक्टर झाओ गांचेंग के हवाले से अखबार ने दावा किया है, 'महामारी, आर्थिक मंदी और किसान आंदोलन की वजह से भारत की सरकार शर्मिंदा है और चीन विरोधी कदम उठाकर घरेलू मुद्दों से ध्यान हटाना चाहती है।' गलवान के शहीदों को सम्मान आपको बता दें कि गलवान घाटी में चीनी सैनिकों से लोहा लेते हुए शहीद होने वाले को महावीर चक्र से सम्मानित किया गया है। वहीं, नायब सूबेदार नुदूराम सोरेन, हवलदार के.पलानी, नायक दीपक सिंह, सिपाही गुरतेज सिंह के साथ गलवान में वीरता के लिए हवलदार तेजेंदर सिंह को वीर चक्र से सम्मानित किया गया है।
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