महिलाओं के लिए ड्राइविंग का हक मांग रहीं Loujain Al-Hathloul की पेशी आतंकवाद कोर्ट में करेगा सऊदी अरब

सऊदी अरब में महिलाओं को गाड़ी चलाने का दिलाने की लड़ाई लड़ रहीं ऐक्टिविस्ट लूजेन अल-हथलऊल को देश के लिए खतरा मान लिया गया है। शायद यही कारण है कि उनका ट्रायल अब राष्ट्रीय सुरक्षा और आतंकवाद के मामलों पर फैसला लेने वाली विशेष अदालत में किया जाएगा। साल 2018 में दूसरी महिला ऐक्टिविस्ट्स के साथ गिरफ्तार की गईं लूजेन को करीब एक साल बाद बुधवार को कोर्ट में पेश किया गया था।

Loujain Al-Hathloul: सऊदी अरब में महिलाओं के लिए ड्राइविंग के अधिकारों की वकालत कर रही ऐक्टिविस्ट का केस अब आतंकवाद की अदालत में सुना जाएगा।


महिलाओं के लिए ड्राइविंग का हक मांग रहीं Loujain Al-Hathloul की पेशी आतंकवाद कोर्ट में करेगा सऊदी अरब

सऊदी अरब में महिलाओं को गाड़ी चलाने का दिलाने की लड़ाई लड़ रहीं ऐक्टिविस्ट लूजेन अल-हथलऊल को देश के लिए खतरा मान लिया गया है। शायद यही कारण है कि उनका ट्रायल अब राष्ट्रीय सुरक्षा और आतंकवाद के मामलों पर फैसला लेने वाली विशेष अदालत में किया जाएगा। साल 2018 में दूसरी महिला ऐक्टिविस्ट्स के साथ गिरफ्तार की गईं लूजेन को करीब एक साल बाद बुधवार को कोर्ट में पेश किया गया था।



'जेल में दी जा रहीं यातनाएं'
'जेल में दी जा रहीं यातनाएं'

लूजेन की बहन लीना ने कहा है कि उनकी बहन को अपने परिवार से मिलने या फोन पर बात करने की इजाजत नहीं है। इसके खिलाफ लूजेन एक बार फिर भूख हड़ताल पर जा रही हैं। ऐसा वह एक साल में दो बार कर चुकी हैं। लीना ने आरोप लगाया है कि लूजेन को जेल में यातनाएं दी जा रही हैं। वह जब बुधवार को कोर्ट पहुंचीं तो बेहद कमजोर लग रही थीं और पेपर भी नहीं पकड़ पा रही थीं।



लंबी सजा देने के लिए कुख्यात अदालत
लंबी सजा देने के लिए कुख्यात अदालत

लीना ने बताया कि जज के मुताबिक केस की सुनवाई जिस क्रिमिनल कोर्ट में हो रही थी वह उसके न्यायक्षेत्र नहीं था। इसलिए आतंकवाद कोर्ट में इसे सुना जाना चाहिए। मानवाधिकार संगठन ऐमनेस्टी इंटरनैशनल ने इसे परेशान करने वाला कदम बताया है। डेप्युटी रीजनल डायरेक्टर ने बताया है कि यह कोर्ट गलत तरीके से किए गए ट्रायल के बाद लंबी जेल की सजा देने के लिए कुख्यात है। लीना का कहना है कि देश के मानवाधिकार आयोग समेत दूसरे संस्थान भी उनकी मदद नहीं कर रहे हैं और उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से सऊदी पर दबाव बनाने की अपील की है।



अनसुनी कर दी मांग
अनसुनी कर दी मांग

गौरतलब है कि हाल ही में खत्म हुई G-20 समिट में महिला सशक्तिकरण पर भी चर्चा की गई थी। समिट से पहले सऊदी से मांग की जा रही थी कि गिरफ्तार की गईं महिला ऐक्टिविस्ट्स को रिहा किया जाए लेकिन इन मांगों को अनसुना कर दिया गया। लीना का कहना है कि सऊदी का महिला सशक्तिकरण का अभियान सिर्फ PR स्टंट है। उनका कहना है कि पता नहीं अब आगे क्या होगा।



नाटक कर रहा सऊदी?
नाटक कर रहा सऊदी?

सऊदी के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने रुढ़िवाद को कम करने, संगीत की इजाजत देने और महिलाओं को और अधिकार देने के साथ अलग छवि बनाने की कोशिश की है लेकिन उनके या उनकी सरकार के खिलाफ बोलने की इजाजत नहीं है। इसका सबसे दर्दनाक उदाहरण पत्रकार जमाल खशोगी का रहा जिनकी साल 2018 में निर्मम हत्या कर दी गई थी। तुर्की की राजधानी इस्तांबुल में सऊदी कॉन्सुलेट में उन्हें मार दिया गया था क्योंकि वह देश के खिलाफ लिखा करते थे।





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