Jonas Masetti जिन्हें PM नरेंद्र मोदी ने बताया विदेशों में भारतीय संस्कृति का दूत

रियो डि जनेरो भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को 'मन की बात' कार्यक्रम के दौरान एक खास व्यक्ति का जिक्र किया। भारत की संस्कृति और शास्त्र को पूरी दुनिया के लिए आकर्षण का केंद्र बताते हुए पीएम मोदी ने ब्राजील के जोनस मसेटी की कहानी सुनाई जो भारत में चार साल का वक्त बिताने के बाद आज टेक्नॉलजी के माध्यम से भारतीय वेदांतों का संदेश दुनियाभर में पहुंचा रहे हैं। पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि कुछ लोग इनकी खोज में भारत आए और पूरी जिंदगी यहीं के हो गए जबकि कुछ वापस लौटकर भारत के लिए सांस्कृतिक दूत बन गए। उन्होंने कहा, 'मुझे जोनस मसेटी के काम के बारे में पता चला जिन्हें विश्वनाथ भी कहते हैं। जोनस ने वेदांत और गीता पर ब्राजील में ज्ञान दिया है। वह 'विश्वविद्या' नाम का संगठन चला रहे हैं जो पेट्रोपोलिस की पहाड़ियों में स्थित है और रियो डि जनेरो से कुछ ही दूर है।' जोनस में है खासियत मकैनिकल इंजिनियरिंग पूरी करने के बाद जोनस ने स्टॉक मार्केट कंपनी के लिए काम किया। बाद में वह भारतीय संस्कृति के प्रति आकर्षित हुए, खासकर वेदांत के प्रति। उन्होंने भारत में वेदांतों की पढ़ाई की और चार साल कोयंबटूर के अर्श विद्या गुरुकुलम में बिताए। PM मोदी ने बताया, 'जोनस में एक और खासियत है कि वह अपने संदेश को आगे पहुंचाने के लिए टेक्नॉलजी का इस्तेमाल कर रहे हैं। वह नियमित रूप से ऑनलाइन प्रोग्राम करते हैं। वह हर रोज पॉडकास्ट करते हैं।' 'चर्चित भाषा में समझाते हैं' पिछले 7 साल में जोनस ने वेदांत पर अपने फ्री ओपने कोर्स के जरिए डेढ़ लाख से अधिक छात्रों को पढ़ाया है। जोनस न केवल एक बड़ा काम कर रहे हैं बल्कि उसे एक ऐसी भाषा में कर रहे हैं जिसे समझने वालों की संख्या भी बहुत अधिक है। लोगों में इसको लेकर काफी रुचि है कि कोरोना और क्वारंटीन के इस समय में वेदांत कैसे मदद कर सकता है? PM ने कहा, 'मैं उनकी कोशिशों क लिए उन्हें बधाई देता हूं और भविष्य के लिए शुभकामनाएं देता हूं।'


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