नई दिल्ली। हिन्दू धर्म में देवउठनी एकादशी का विशेष महत्व है। यह त्यौहार कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाया जाता है पौराणिक मान्यताओँ के अनुसार भगवान विष्णु चार माह की निद्रा के बाद जागते हैं इसलिए इसे देवोत्थान या देवउठनी एकादशी कहा जाता है। भगवान विष्णु के नींद से जागने के बाद लोग इनका आर्शीवाद पाने के लिए कई उपाय करते हैं। लेकिन आर्शीवाद पाने के साथ कुछ बाते ऐसी भी है जिसे देवउठनी एकादशी के दिन भूलकर भी नहीं करनी चाहिए।
चावल का सेवन न करें
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार एकादशी के दिन जो लोग व्रत रखते है उन्हें चावल का सेवन नहीं करना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि इस दिन चावल का सेवन करने से मनुष्य का जन्म रेंगने वाले जीव की योनि में होता है। यदि आप व्रत भी नहीं रखते हैं, उन्हें भी चावल का सेवन करने से बचना चाहिए।
मांस-मदिरा का सेवन नहीं करना चाहिए
हमारे दिदी धर्म में बैसे तो हर किसी पूजन में मांस- मंदिरा का सेवन नहीं करना चाहिए। और आज के दिन भी यदि आप भूल से भी इन सभी चीजों को घर लाते है या फिर इसका सेवन करते है। तो आपको जीवन में कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इस दिन व्रत करना चाहिए। और सात्विक भोजन का ही सेवन करें।
महिलाओं का अपमान नहीं करना चाहिए
एकादशी के दिन महिलाओं के साथ सम्मान के साथ पेश आए। अपमान करने से व्रत का फल नहीं मिलता है। जो व्यक्ति महिलाओं का सम्मान नहीं करते हैं उन्हें जीवन में कई तरहों की समस्याओं का सामना करना पड़ता है
गुस्सा न करें
एकादशी के दिन लोग भगवान विष्णु की अराधना करते है, इस दिन सिर्फ भगवान का गुणगान करना चाहिए। एकादशी के दिन गुस्सा नहीं करना चाहिए और वाद-विवाद से दूर रहना चाहिए।
शारीरिक संबंध नहीं बनाने चाहिए
एकादशी के दिन ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से विशेष लाभ की प्राप्ति होती है।
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