कोरोना वायरस के बीच बढ़ रही एंटीबॉडी टेस्ट की मांग

नई दिल्ली भारत में हर रोज जैसे-जैसे के मामले बढ़ रहे हैं वैसे-वैसे लोग की मांग बढ़ती जा रही है। लोग ये जानना चाहते हैं कि क्या वो पहले संक्रमित हो चुके हैं और उनके शरीर में एंटीबॉडी बना है या नहीं। कई संस्थान अपने-अपने कर्मचारियों का भी टेस्ट करा रही हैं ताकि आगे किसी तरह की कोई दिक्कत न होने पाए। एंटीबॉडी टेस्ट की बढ़ी मांगएंटीबॉडी टेस्ट सेंटरों और अस्पतालों ने कहा कि एंटीबॉडी टेस्ट टेस्ट की मांग बढ़ती जा रही है। ये टेस्ट रक्त में एंटीबॉडी का पता लगाने में मदद करते हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि कोई व्यक्ति संक्रमित है या नहीं। हालांकि, कुछ राज्यों में इस तरह के परीक्षणों पर कठोर नियम और प्रतिबंध लगाए गए हैं। उनमें हरियाणा और तमिलनाडु दो ऐसे राज्य हैं जिन्होंने इस टेस्ट के लिए नियम कठिन कर दिए हैं। प्राइवेट लैब्स की मांगनिजी प्रयोगशालाएं मांग बढ़ने की उम्मीद कर रही हैं और सभी राज्यों ने शुक्रवार को केंद्र सरकार की सलाह के बाद नियमों में ढील देने के लिए कहा है। एंटबॉडी टेस्ट दो प्रकार का होता है। पहला कुल एंटीबॉडी और दूसरा आईजीजी एंटीबॉडी परीक्षण। विशेषज्ञों ने कहा कि आईजीजी परीक्षण विशिष्ट एंटीबॉडी का पता लगाने में मदद करता है। इस टेस्ट से तुरंत पता चलता है कि व्यक्ति कोरोना वायरस से संक्रमित था या नहीं। हर रोज इतने चेकअपएसआरएल डायग्नॉस्टिक्स के सीईओ आनंद के मुताबिक वर्तमान में देश की प्रमुख निजी प्रयोगशालाएं प्रतिदिन 1,000-1,400 एंटीबॉडी परीक्षण कर रही हैं। पहले इनके परीक्षणों की मांग में गिरावट आई थी। लेकिन अब, परीक्षण विकसित हो गए हैं और सरकार इसका कई राज्यों में व्यापक रूप से सीरोसेर्वे के लिए उपयोग कर रही है।लोग आमतौर पर उत्सुक हैं और वे जानना चाहते हैं कि क्या उनके पास ये एंटीबॉडी हैं या नहीं। डॉक्टरों ने कहा कि जैसे-जैसे कार्यालय खुल रहे हैं और लोग तेजी से घरों से बाहर निकल रहे हैं, यह जानने की उत्सुकता है कि क्या वे पहले ही संक्रमित हो चुके हैं। यह एक व्यक्ति को आश्वस्त करता है कि उसने कुछ प्रतिरक्षा विकसित की है। ये परीक्षण आमतौर पर एंटीबॉडी का पता लगाने में सफल होते हैं।


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