चीन की धमकियों के बीच भारत की तैयारी, इस रास्ते से और भारी होगा भारत का पलड़ा

नई दिल्ली चीन के साथ सीमा विवाद () के बीच भारत ने एक और सफलता हासिल कर ली है। चीन की बार-बार की धमकी के बीच भारत ने दारचा और लेह को जोड़ने वाले हाइवे (Nimmu-Padam-Darcha Road) का काम बहुत जल्दी पूरा कर लिया है। इस रास्ते से सैनिकों के लिए रसद और हथियार पहुंचाने में काफी आसानी होगी। इस हाइवे से करगिल क्षेत्र में भी पहुंच आसान हो जाएगी।ये मार्ग रणनीतिक तौर पर काफी अहम है। इस सड़क पर सैनिकों की मूवमेंट को ट्रेस कर पाना पड़ोसी देशों के लिए नामुमकिन की हद तक मुश्किल होगा। अब बचेंगे 5-6 घंटे बॉर्डर रोड्स टास्क फोर्स (BRTF) के सुपरिंटेंडेंट इंजिनियर एमके जैन ने बताया कि निम्मू-दारचा (Nimmu-Padam-Darcha Road) और लेह को जोड़ने वाला हाइवे जल्द ही शुरू हो जाएगा। 280 किलोमीटर लंबे इस हाइवे के जरिए मनाली से लेह (Manali to Leh) जाने में करीब 5-6 घंटे की बचत होगी। उन्होंने कहा कि यह रोड लो ऐल्टिट्यूड में है इसलिए साल के 10-11 महीने इसे खालो जा सकेगा। उन्होंने कहा कि हाइवे में केवल 30 किलमीटर थोड़ा काम बाकी है और तब तक के लिए डाइवर्टिंग और कनेक्टिंग रोड की मदद ली जाएगी। यहां पहले से दो राजमार्ग हैं लेकिन उनके जरिए मनाली से लेह पहुंचने में ज्यादा समय लगता है। मनाली-लेह मार्ग और श्रीनगर-लेह राजमार्ग ऑपरेशनल हैं। सूत्रों के मुताबिक हिमाचल से लद्दाख तक एक और वैकल्पिक मार्ग को दोबारा खोलने का काम चल रहा है और यह 2022 तक चालू हो सकता है। लद्दाख में सब-सेक्टर नॉर्थ (एसएसएन) तक पहुंच सूत्रों ने कहा कि लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर दौलत बेग ओल्डी और देपसांग जैसे अनेक अहम इलाकों तक सैनिकों की आवाजाही के लिए अनेक सड़क परियोजनाओं पर काम तेज किया जा रहा है। सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) लद्दाख को डेपसांग से जोड़ने वाली एक अहम सड़क पर भी काम कर रहा है। यह सड़क लद्दाख में सब-सेक्टर नॉर्थ (एसएसएन) तक पहुंच प्रदान करेगी। 12 महीने खुला रहेगा मार्गइस सड़क का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि ये सड़क लगभग पूरे वर्ष खुला रह सकता है। दो अन्य सड़कें केवल 6-7 महीनों के लिए खुली रहती थीं और आमतौर पर नवंबर से छह महीने की अवधि के लिए बंद रहती थीं। बीआरओ इंजीनियरों ने कहा कि यह सड़क अब प्रयोग में आने वाली है और कई टन वजन वाले भारी वाहनों के लिए तैयार है। कम ऊंचाई में है ये मार्ग16 बीआरटीएफ अधीक्षण अभियंता कमांडर एमके जैन ने कहा, 'यह सड़क 30 किलोमीटर की दूरी को छोड़कर तैयार है। अब सेना इस सड़क का उपयोग कर सकती है। इस सड़क का महत्व यह है कि सेना मनाली से लेह तक के मार्ग में लगभग 5-6 घंटे बचा सकती है।' जैन ने कहा, "इसके अलावा, जैसा कि यह सड़क कम ऊंचाई पर है और वाहन चालन के लिए यह लगभग 10-11 महीनों तक खुला रह सकता है। यह सड़क 258 किलोमीटर लंबी है। हमने इसे अलग-अलग सड़क से 30 किलोमीटर की दूरी के रूप में मोड़कर और इसे जोड़कर कनेक्टिविटी दी है।


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