जॉर्ज मर्डर: US, UK और ऑस्ट्रेलिया में जनज्वार

जॉर्ज फ्लॉयड की मौत के बाद अमेरिका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया में नस्लीय भेदभाव को लेकर लगातार प्रदर्शन जारी है। कुछ दिन पहले तक जब कोरोना वायरस के कारण अमेरिका ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया की सड़कों पर कोई नहीं दिखाई देता था वहीं, आज उसी सड़कों पर हजारों की भीड़ इंसाफ मांगने के लिए कंधे से कंधा मिलाए प्रदर्शन कर रही है। अमेरिका में तो स्थिति इतनी बिगड़ गई कि लगभग 40 शहरों में कर्फ्यू का ऐलान करना पड़ा। हालांकि, बाकी देशों से किसी प्रकार के हिंसा की खबर नहीं है।

अश्वेत अमेरिकन George Floyd की पुलिस के हाथों मौत के बाद इंसाफ की मांग कर रहे प्रदर्शनकारी अब खुद बर्बरता का सामना कर रहे हैं। प्रदर्शनों के दौरान पुलिस की सख्ती कई बार सीमा लांघ चुकी है जिससे कई लो ग घायल हुए हैं, तो कुछ की मौत हो चुकी है। ऐसे में पुलिस की संवेदनहीनता के खिलाफ नए सिरे से आवाजें बुलंद की जा रही हैं। गौर करने वाली बात यह है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप खुद भी प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बल प्रयोग की वकालत कर चुके हैं।

बताया जा रहा है कि अमेरिका के इतिहास में 52 साल बाद यह सबसे भीषण हिंसा और नस्लीय अशांति की घटना है। इससे पहले साल 1968 में मार्टिन लूथर किंग की हत्या के बाद ऐसा ही हिंसक संघर्ष देखने को मिला था। न्यूयॉर्क, शिकागो, फिलाडेल्फिया और लॉस एंजिल्स में प्रदर्शनकारियों के साथ पुलिस की झड़प की खबरें भी आईं। कई शहरों में पुलिस से मामला काबू में होता न देखकर कई शहरों में अमेरिका की रिजर्व फोर्स नेशनल गार्ड्स को तैनात किया गया है।

अमेरिका में जॉर्ज फ्लॉयड की मौत के बाद शुरू हुए नस्लवाद-विरोधी प्रदर्शनों में पूरे ब्रिटेन में हजारों लोग शामिल हुए। इन प्रदर्शनों को लंदन, मैनचेस्टर, कार्डिफ़, लीसेस्टर और शेफ़ील्ड सहित शहरों में आयोजित किया गया था। लंदन में, प्रदर्शनकारियों ने no justice, no peace और black lives matter के नारे लगाए। ब्रिटेन में ये विरोध प्रदर्शन अधिकांश जगह शांतिपूर्ण रहे, हालांकि प्रधानमंत्री निवास के पास कुछ लोगों ने अराजकता फैलाने की कोशिश की जिसके बाद पुलिस ने कार्रवाई की।

लंदन के मेयर सादिक खान ने प्रदर्शनकारियों से कहा कि मैं आपके साथ खड़ा हूं और मैं आपके गुस्से और आपके दर्द को साझा करता हूं। बता दें कि प्रधानमंत्री निवास 10 डाउनिंग स्ट्रीट के बाहर हुए प्रदर्शन में 10 पुलिसकर्मियों को चोटे आई हैं। पुलिस ने 14 प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार भी किया है। वहीं लंदन के पुलिस आयुक्त ने कहा कि ये विरोध प्रदर्शन गैरकानूनी थे और इसके लिए कोई अनुमति नहीं दी गई है।

जॉर्ज फ्लॉयड की मौत के विरोध में ऑस्ट्रेलिया में भी हजारों की संख्या में लोगों ने सड़कों पर उतरकर अपना विरोध जताया। कोरोना वायरस के कारण ऑस्ट्रेलियाई अधिकारियों ने रैली की इजाजत नहीं दी इसके बावजूद लोगों ने प्रदर्शन किया। सिडनी में कुछ आयोजकों पर स्वास्थ्य नियमों को तोड़ने के लिए जुर्माना लगाया गया। इन रैलियों का आयोजन ब्रिसबेन, मेलबर्न, होबार्ट, एडिलेड और अन्य जगहों पर किया गया।

पुलिस ने बताया कि सिडनी के सेंट्रल स्टेशन पर शाम को कुछ अराजक लोगों पर पुलिस ने पेपर स्प्रे का प्रयोग किया। इसके अलावा सभी रैलियां शांतिपूर्ण खत्म हो गई। पुलिस ने तीन लोगों को हिरासत में लिए जाने की पुष्टि की है। रैली के दौरान कई लोगों ने ऑस्ट्रेलियाई पुलिस के खिलाफ भी नस्लभेदी कार्रवाई के आरोप में प्रदर्शन किया।



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