फीवर क्लीनिक से कोरोना संदिग्ध को पहचानने में मिल रही मदद, अब तक 13 हजार लोगों का हुआ इलाज

इंदौर। कोरोना महामारी को रोकने के लिए राज्य सरकार के द्वारा  खोली गई फीवर क्लीनिक का लोगों को फायदा मिल रहा है। फीवर क्लीनिक के माध्यम से कोरोना वायरस संक्रमण के समय स्वास्थ्य सुविधाओं का एक वैकल्पिक परंतु कारगर प्लेटफॉर्म तैयार किया है। लॉक डाउन के चलते तथा कोरोना वायरस संक्रमण से उत्पन्न हुए डर के कारण आम जनता को विभिन्न परेशानियों का सामना करना पड़ा। इस कारण अति आवश्यक स्वास्थ्य सुविधाएं भी प्रभावित हुई। जिसे लेकर लोगों में न केवल भय और आशंका थी, बल्कि कई प्राइवेट अस्पतालों ने लोगों को इलाज एवं चिकित्सकीय परामर्श देने से इंकार भी किया जिससे जनता की परेशानियां और भी बढ़ गई।

निशुल्क उपलब्ध कराई जाती है
शहर के कलेक्टर मनीष सिंह के निर्देशानुसार आम जनता की इन परेशानियों को समझते हुए फीवर क्लिनिकों की स्थापना की। इन क्लिनिकों में चिकित्सकीय परामर्श की निशुल्क सुविधा दी जाती है। साथ ही दवा आदि भी निशुल्क उपलब्ध कराई जाती है।

दर-दर भटकना पड़ रहा था
फीवर क्लीनिक के माध्यम से अब जनता आसानी से स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ ले पा रही है। अब पहले जैसी स्थिति नहीं रही जब उन्हें इलाज के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा था।


कोरोना संदिग्ध पहचानने में भी मिली मदद
फीवर क्लिनिको में मरीजों की स्क्रीनिंग की जाती है। इस दौरान यदि किसी व्यक्ति में कोरोना संक्रमण के लक्षण दिखाई देते हैं तो इन मरीजों को एंबुलेंस के द्वारा एमटीएच अस्पताल भेजकर वहां इनका टेस्ट किया जाता है। टेस्ट के परिणाम के आधार पर आगे उपचार किया जाता है। इस संपूर्ण प्रक्रिया में फीवर क्लीनिक के माध्यम से ऐसे मरीजों को भी चिन्हित कर लिया जाता है जो क्लीनिक ना होने की दशा में सर्वे अथवा स्क्रीनिंग से छूट सकते थे। फीवर क्लीनिक का एक अतिरिक्त बेनिफिट करोना संक्रमित मरीजों एवं क्षेत्रों को पहचानना भी है।फीवर क्लीनिक के माध्यम से साढ़े 13 हजार से भी अधिक लोगों ने स्वास्थ्य संबंधी परामर्श प्राप्त किया है।



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