<p style="text-align: justify;"><strong>South Korea Bans Short Selling:</strong> दक्षिण कोरिया के फाइनेंशियल रेग्यूलेटर ने वहां के शेयर बाजार में शॉर्ट सेलिंग पर प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है. दक्षिण कोरिया के फाइनेंशियल सर्विस कमीशन ने ये बैन लगाया है जो कि जून 2024 तक लागू रहेगा. दक्षिण कोरिया के शॉर्ट सेलिंग पर बैन लगाने का फैसला वहां के स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्टेड सभी स्टॉक्स पर लागू होगा. </p> <h3 style="text-align: justify;"><strong>आने वाले चुनावों के चलते लगा बैन</strong></h3> <p style="text-align: justify;">2024 में दक्षिण कोरिया में चुनाव होने वाला है. लेकिन घरेलू शेयर बाजार में ग्लोबल संस्थागत निवेशकों की ओर गैरकानूनी नेकेड शॉर्ट सेलिंग (Naked Short Selling) का मामला देखा जा रहा था. ऐसे में चुनावों से पहले रिटेल निवेशकों को खुश करने के चलते शॉर्ट सेलिंग पर बैन लगाने का फैसला लिया गया है. वहां के रेग्यूलेटर ने गैरकानूनी शॉर्ट सेलिंग को लेकर विदेशी संस्थागत इंवेस्टर्स के खिलाफ कार्रवाई करने के भी संकेत दिए हैं. इस शॉर्ट सेलिंग में बगैर शेयर को खरीदे या फिर ये कंफर्म किए बगैर कि शेयर को भविष्य में खरीदा जाएगा, शेयरों की शॉर्ट सेलिंग की जाती है. भारत में नेकेड शॉर्ट सेलिंग की इजाजत रेग्यूलेटर नहीं देता है. </p> <h3 style="text-align: justify;"><strong>शॉर्ट सेलिंग के नियमों को किया जाएगा सख्त </strong></h3> <p style="text-align: justify;">रेग्यूलेटर का कहना है कि अगले वर्ष जून तक फाइनेंशियल सर्विस कमीशन शॉर्ट सेलिंग के रेग्यूलेशन को सख्त बनाने का काम करेगी. दक्षिण कोरिया की राजनीति में शॉर्ट सेलिंग एक बड़ा चुनावी मुद्दा बनता जा रहा है. कोरोना महामारी के दौरान भी दक्षिण कोरिया के रेग्यूलेटर्स ने शॉर्ट सेलिंग पर बैन लगाया था जिससे शेयर बाजार में तेजी लाया जा सके. इस बैन को 2021 में दक्षिण कोरिया के रेग्यूलेटर्स ने वापस ले लिया था. और अभी भी जब रेग्यूलेटर्स ने शॉर्ट सेलिंग पर बैन लगाया तो दक्षिण कोरिया के एक्सचेंज कोस्पी में लिस्टेड कंपनियों के स्टॉक्स में तेजी देखने को मिली. </p> <h3 style="text-align: justify;"><strong>हिंडनबर्ग रिपोर्ट के बाद चर्चा में शॉर्ट सेलिंग </strong></h3> <p style="text-align: justify;">भारत में जनवरी 2023 में शॉर्ट सेलिंग शब्द जोर शोर के साथ चर्चा में आई थी. शॉर्ट सेलर हिंडनबर्ग ने अडानी समूह पर शेयरों के भाव को अनैतिक तरीके से भगाने का आरोप लगाते हुए रिपोर्ट जारी किया. हिंडनबर्ग ने अडानी समूह के स्टॉक में शॉर्ट सेलिंग की. जिसके बाद शेयर बाजार में लिस्टेड अडानी समूह की कंपनियों के स्टॉक्स में जोरदार गिरावट देखने को मिली थी. ये माना जा रहा है कि हिंडनबर्ग ने अडानी समूह के शेयरों को शॉर्ट कर जोरदार मुनाफा बनाया. अडानी समूह के मार्केट कैप में 140 बिलियन डॉलर की गिरावट आ गई थी. जब भी बाजार में कोई नेगेटिव खबरें किसी कंपनी या सेक्टर को लेकर आती है तो शॉर्ट सेलिंग बढ़ जाती है. भारत में 2001 में शॉर्ट सेलिंग पर बैन लगा था. </p> <h3 style="text-align: justify;"><strong>क्या होती है शॉर्ट सेलिंग? </strong></h3> <p style="text-align: justify;">शॉर्ट सेलिंग को शेयर बाजार में ट्रेडिंग करने का तरीका है. शॉर्ट सेलिंग के तहत कोई भी निवेशक ऊंचे भाव पर शेयर को बेचता है और शेयर के भाव के नीचे गिरने पर उसे वापस खरीद लेता है. जिस ऊंचे भाव पर शेयर बेचा गया और जिस नीचे के भाव पर शेयर खरीदा गया दोनों के बीच जो अंतर है वो उस निवेशक का मुनाफा है. यानि कोई भी निवेशक केवल शेयर खरीदकर ही बाजार में मुनाफा नहीं बनाता है बल्कि शेयरों को खरीदे बिना उसे बेचकर भी मुनाफा बना सकता है इसी को शॉर्ट सेलिंग कहते हैं. भारत में रेग्यूलेटर ने कैश के साथ फ्यूचर और ऑप्शन में भी शॉर्ट सेलिंग की जा सकती है. </p> <p style="text-align: justify;"><strong>ये भी पढ़ें </strong></p> <p style="text-align: justify;"><strong><a title="Crude Oil Price: मॉर्गन स्टैनली ने अपने नोट में कहा, कच्चा तेल 110 डॉलर प्रति बैरल के पार गया तो और महंगा होगा कर्ज" href="https://ift.tt/j3PxTm5" target="_self">Crude Oil Price: मॉर्गन स्टैनली ने अपने नोट में कहा, कच्चा तेल 110 डॉलर प्रति बैरल के पार गया तो और महंगा होगा कर्ज</a></strong></p> <p> </p>
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