सिद्ध स्थान के रूप में जाना जाता है शनिदेव का यह 450 साल पुराना मंदिर

इंदौर. आज भगवान शनि देव का प्रकाट्य उत्सव मनाया जा रहा है। इस बार शनि जयंती शुक्रवार के दिन वट सावित्री अमावस्या पर आई है। शनि जयंती पर जूनी इंदौर के शनि मंदिर में सुबह से ही भक्तों की कतार लग गई है। दरअसल यह मंदिर शनिदेव के सिद्ध स्थान के रूप में जाना जाता है जिसके कारण यहां लोगों की भीड़ लगी रहती है। हम आपको इस मंदिर के बारे में विस्तार से बता रहे हैं—

यह इलाके का सबसे पुराना शनि मंदिर है। मंदिर के पुजारी पं.नीलेश तिवारी बताते हैं कि शनिदेव का ये मंदिर करीब साढ़े चार सौ साल पुराना है। यहां स्थापित शनिदेव की मूर्ति स्वयंभू बताई जाती है। कहते हैं कि यह मूर्ति किसी ने बनाई या लगाई नहीं बल्कि खुद प्रकट हुई थी।

जब मंदिर में हुआ चमत्‍कार...
इस मूर्ति से जुड़ा एक और चमत्कार की बात यहां बहुत कही सुनी जाती है। बताते हैं कि मंदिर में शनिदेव की मूर्ति अपना स्थान खुद बदल चुकी है। शनि विग्रह पहले मंदिर में रामजी की मूर्ति के स्थान पर स्थापित थी। एक बार शनिचरी अमावस्या पर इस मूर्ति ने अपना स्थान बदल लिया और वर्तमान जगह पर स्‍थापित हो गई।

तब से शनि मूर्ति वहीं है और उनकी पूजा अर्चना की जा रही है। इन चमत्कारों की बात प्रचलित होने से यह मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बन गया। शनि जयंती पर मंदिर में उत्सव मनाया जाता है जहां उत्साहपूर्वक कई कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।



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