इंदौर. नगर निगम ने कल की तरह आज सुबह फिर जल मार्च निकाला। इसमें शामिल हुए स्कूल के बच्चों ने निगम अफसरों के सामने कई सवाल खड़े किए। जैसे शहर में कितने कुएं, बावड़ी और तालाब हैं। बारिश के दौरान कितना पानी गिरता है। इन सवालों का जवाब देने के साथ निगम अफसरों ने रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम को लेकर भी जिज्ञासा को भी दूर किया। साथ ही कुओं एवं बावडिय़ों को देखकर जाना कि किस प्रकार से जल का प्राकृतिक संरक्षण होता है।
शहर में निगम भू-जल संवर्धन अभियान चला रहा है। इसके तहत कल की तरह आज सुबह 7 बजे जल मार्च निकाला गया। चोइथराम चौराहा और आईटी चौराहा से अलग-अलग मार्च निकले। इनमें चमेली देवी पब्लिक स्कूल, वैष्णव स्कूल, श्री रवि शंकर स्कूल, मार्थोमा स्कूल, गुजराती स्कूल, आईएटीवी स्कूल के बच्चे और एक्रोपोलिस कॉलेज के छात्र-छात्राएं शामिल हुए। इन्होंने चोइथराम चौराहे का कुआं, लेक पार्क कॉलोनी की बावड़ी, अमितेष नगर में सरस्वती नदी और पीपल्यापाला तालाब देखा। आईटी पार्क चौराहा से शुरू हुए जल मार्च में छात्र-छात्राओं ने आईटी पार्क चौराहे का कुआं, गणेश नगर का कुआं और बिलावली तालाब का भ्रमण किया। इसके बाद सभी रीजनल पार्क पहुंचे और रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम के बारे में मॉडल के जरिए जाना। रीजन पार्क में अधीक्षण यंत्री महेश शर्मा, सहायक यंत्री सुनील गुप्ता, आरएस देवड़ा, जनसंपर्क अधिकारी राजेंद्र गेरोठिया आदि मौजूद थे।
बताया इंदौर में किस तरह हुआ कुएं-बावड़ी का निर्माण
रीजनल पार्क में जल मार्च के समापन अवसर पर स्कूल के बच्चों ने अपने नॉलेज को शेयर किया। साथ ही सवालों की झडी अलग लगा दी। विद्यार्थियों ने पूछा कि रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम कैसा होता है? इसके क्या फायदे और यह कितने प्रकार का होता है? बारिश के पानी का पीएच लेवल कितना होता है? पानी प्यूरीफाई कैसे होता है? एसटीपी पर क्या होता है? बारिश के दौरान पानी को किस प्रकार से जमीन में उतारा जा सकता है? इस प्रकार के कई सवाल बच्चों ने पूछे। जिनका जवाब निगम के अफसरों एवं तकनीकी विशेषज्ञ ने विस्तार से दिया। साथ ही बच्चों को बताया गया कि इंदौर में किस प्रकार से जल स्त्रोत के लिए कुओं और बावडिय़ों का निर्माण किया गया था। किस प्रकार से वर्षा जल का संग्रहण तालाबों एवं प्राकृतिक स्रोतों से किया जाता है।
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