रूसी सेना कर रही बमों की बारिश, यूक्रेन के किलर ड्रोन- मिसाइलों ने भी शुरू की गर्जना

कीव यूक्रेन की तीन तरफ से घेराबंदी कर चुकी रूस की सेना ने बेलारूस के साथ मिलकर जोरदार युद्धाभ्‍यास शुरू किया है। रूस और बेलारूस के बीच 10 दिनों तक चलने वाले इस अभ्‍यास में करीब 30 हजार सैनिक, टैंक और तोपें हिस्‍सा ले रही हैं। उधर, रूस-बेलारूस को करारा जवाब देने के लिए यूक्रेन की सेना ने भी 10 दिनों तक के लिए सैन्‍य अभ्‍यास शुरू कर दिया है। यूक्रेन की सेना रूसी टैंकों और तोपों को तबाह करने के लिए तुर्की से मिले बेहद खतरनाक हमलावर ड्रोन बायरकतार से हमले का अभ्‍यास कर रही है। इसके अलावा यूक्रेन की सेना को अमेरिका से मिले जवेल‍िन एंटी टैंक मिसाइलों और ब्रिटेन से मिली बंकर को तबाह करने वाली मिसाइलों की भी ट्रेनिंग दी जा रही है। पिछले एक महीने से जारी इस गतिरोध के बीच दोनों ही देशों की सेनाएं पूरी तरह से जंग के लिए तैयार नजर आ रही हैं। रूस ने यूक्रेन की सीमा पर 1 लाख 30 हजार सैनिकों को तैनात किया है। इसमें 100 युद्धक समूह, इश्‍कंदर समेत खतरनाक मिसाइलें, सुखोई-35 फाइटर जेट और टी-72 समेत कई घातक टैंक यूक्रेन की सीमा के पास अपने इलाके में तैनात कर दिए हैं। यूक्रेन और रूस में जंग छिड़ती है तो जाएगी 50 हजार लोगों की जान अमेरिकी सेना के जनरल मार्क मिली के मुताबिक शीत युद्ध के बाद पहली बार इतनी बड़ी तादाद में रूस ने अपनी सेना को सीमा पर तैनात किया है। रूस ने अपने सहयोगी बेलारूस के साथ मिलकर यह अभ्‍यास ऐसे समय पर शुरू किया है जब अमेरिका और अन्‍य नाटो देशों ने चेतावनी दी है कि रूस कभी भी यूक्रेन पर हमला कर सकता है। रूस और यूक्रेन के बीच अगर जंग छिड़ती है तो द्वितीय विश्‍वयुद्ध के बाद इसे सबसे खूनी जंग में शामिल किया जा सकता है। इसी खतरे को देखते हुए जहां फ्रांसीसी राष्‍ट्रपति और ब्रिट‍ेन के नेता रूस को समझाने का प्रयास कर रहे हैं, वहीं अमेरिकी राष्‍ट्रपति बाइडन ने पुतिन को भयानक परिणाम भुगतने चेतावनी दी है। अमेरिकी राष्‍ट्रपति कार्यालय वाइट हाउस ने पिछले सप्‍ताह चेतावनी दी थी कि अगर यूक्रेन और रूस में जंग छिड़ती है तो 50 हजार लोगों की जान जाएगी। अमेरिकी अधिकारियों को भय सता रहा है कि रूस और बेलारूस युद्धाभ्‍यास के नाम पर अपने हमले की तैयारी को छिपाने की कोशिश कर रहे हैं। आर्मीनिया में रूसी हथियारों को तबाह कर चुका है टीबीटी 2 ड्रोन रक्षा विश्‍लेषकों का कहना है कि इस युद्धाभ्‍यास से कई परिदृश्‍य उभरकर सामने आ रहे हैं। इसमें कई तरफ से हमला, पूर्ण कब्‍जे से लेकर सीम‍ित दायरे का हमला (रूस के उत्‍तरी और पूर्वी इलाके से घुसपैठ) या रूस के नियंत्रण वाले क्रीमिया इलाके और अजोव सागर से अटैक शामिल है। यह सबकुछ यूक्रेन पर साइबर हमले के साथ सामंज‍स्‍य को मिलाकर किया जा सकता है। बता दें कि यूक्रेन की मदद के लिए नाटो सदस्‍य देश तुर्की भी आ गया है और उसने आर्मीनिया में तबाही मचाने वाले अपने बयरकतार टीबीटी 2 ड्रोन की बड़े पैमाने पर यूक्रेन को सप्‍लाइ की है। यूक्रेन के एयरफोर्स कमांड के प्रवक्‍ता कर्नल यूरी इग्‍नाती ने अल मॉनीटर से बातचीत में कहा, 'तुर्की का यह ड्रोन दुश्‍मन की तोपों पर बहुत सटीक हमला करता है और टैंकों की कॉलम को भी नष्‍ट कर देता है। यह बहुत अच्‍छी क्‍वालिटी का ड्रोन है जो रियट टाइम में हमला करता है और पूरी तरह से स्‍वचालित सिस्‍टम है। यह ड्रोन एक हथियार है जो मात्रा सेकंडों में हमला करने की ताकत रखता है। यह ड्रोन सक जासूस है। इसने यूक्रेन को अपने दुश्‍मन पर गुणवत्‍ता आधारित बढ़त दे दी है।' सीरिया के आसमान में दम दिखाकर दुनिया में पहचान बनाई इस ड्रोन को बनाने वाली कंपनी बायकर ने 1984 में ऑटो पार्ट्स बनाने का काम शुरू किया था, बाद में वह एयरोस्पेस इंडस्ट्री में शामिल हो गया। नाटो सदस्य पोलैंड ने पिछले साल ही कहा था कि वह तुर्की से 24 टीबी2 ड्रोन खरीदेगा। तुर्की का दावा है कि नाटो के कई दूसरे देश भी उसके साथ डील करने के लिए बातचीत कर रहे हैं। TB2 ड्रोन ने 2020 की शुरुआत में सीरिया के आसमान में अपना दम दिखाकर दुनिया में पहचान बनाई थी।


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