पति ने मेरी दो बेटियों के दिमाग में जहर भर दिया है, सुप्रीम कोर्ट ने पूछा - 16 साल की लड़की को हम जबरन मम्मी से बात करने का ऑर्डर दें?

धनंजय महापात्र, नई दिल्ली क्या आज के वक्त में एक 16 साल की लड़की को उसकी मां से बात करने के लिए कोर्ट बाध्य कर सकता है? वो भी तब जब लड़की अपने पिता के साथ अच्छे से रह रही हो और अपनी मां से बात नहीं करना चाहती हो। ये सवाल सुप्रीम कोर्ट ने अमेरिका में रहने वाली एक मां से पूछा, जिसने अपने पति पर अपनी दोनों बेटियों के दिमाग में जहर भरने का आरोप लगाते हुए शीर्ष अदालत से बेटियों से बात करने की गुहार लगाई है। महिला ने पति पर लगाए आरोप पारसी समुदाय से ताल्लुक रखने वाली महिला ने शीर्ष अदालत में दाखिल अपनी अर्जी में आरोप लगाया है कि उसके पति से रिश्ते खराब हैं और वह उनकी बेटियों को लेकर चुपचाप भारत चला आया था। महिला की तरफ से कोर्ट में पेश हुए वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ लूथरा ने कहा कि महिला की बेटियां केवल 15 और 13 साल की हैं। उन्होंने कहा कि उसका पति 2019 में अमेरिकी कोर्ट को यह भरोसा देने के बाद कि वह दो सप्ताह बाद लौट आएगा अभीतक अमेरिका नहीं लौटा है। महिला ने कहा कि अमेरिका की अदालत में उसने पति के खिलाफ तलाक की याचिका 2017 में डाल रखी है। महिला का आरोप, पति चुपचाप अमेरिका से भाग आया महिला की तरफ से पेश वरिष्ठ वकील लूथरा ने कहा कि चूंकि महिला का पति 2019 में ही दोनों बेटियों के साथ अमेरिका छोड़कर भाग गया था ऐसे में एक मां अपनी बेटियों से फोन पर या वीडियो कॉल पर बात करने के लिए संघर्ष कर रही है। पति की दलील, बेटियां खुद नहीं करना चाहती हैं बात महिला के पति की तरफ से पेश वकील सिद्धार्थ भटनागर ने कोर्ट को बताया कि उसकी एक बेटी वयस्क हो चुकी है और विदेश में पढ़ाई कर रही है और दूसरी बेटी 16 साल की हो चुकी है। चूंकि उसकी बेटियां अपनी मां से बात नहीं करना चाहती है तो उसमें महिला का पति क्या कर सकता है। इसपर शीर्ष अदालत की बेंच ने कहा, 'छोटी लड़की 16 साल की है। जो भी इस उम्र के होते हैं वो अपने अच्छा-बुरा में फर्क जानता है। आपको लगता है कि एक पिता 16 साल की लड़की को सिखा सकता है?' कोर्ट ने महिला से पूछा कि पिछले साल उसने कितनी बार अपनी बेटियों से बात करने की कोशिश की थी? चीफ जस्टिस बोले- हम हाथ पकड़कर बात करने का आदेश नहीं दे सकते चीफ जस्टिस एन वी रमण (chief Justice of India NV Ramana ) की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि वह किसी का हाथ पकड़कर उसे अपनी मां से बात करने को नहीं कह सकते हैं। कोर्ट केवल यह फैसला कर सकता है कि क्या बच्चे सही फैसला ले रहे हैं या नहीं। कोर्ट ने महिला के पति से पूछा कि क्या वह अपनी बेटियों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग अरेंज करवा सकते हैं? इसपर पति की तरफ से पेश वकील भटनागर ने कहा कि इस बारे में कोर्ट को कोई आदेश देने की जरूरत नहीं और वे बुधवार को खुद ही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग अरेंज करवा देंगे। गौरतलब है कि पिछले साल बॉम्बे हाईकोर्ट ने भी दोनों लड़कियों की बात सुनने के बाद महिला की दोनों बच्चों की कस्टडी की अपील को ठुकरा दिया था।


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