पहली बार जहर से कैसे हुई थी इंसानों की मौत ? 5000 साल पुरानी हड्डियों ने खोला राज

मैड्रिड वैज्ञानिकों ने 5000 साल पुरानी कुछ मानव हड्डियों की खोज की है। जिनमें उच्च स्तर का पारा (Mercury) पाया गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह मरक्यूरी जहर का सबसे पुराना सबूत है। हड्डियों की खोज स्पेन और पुर्तगाल में की गई है जो 370 व्यक्तियों की हैं। ये लोग नवपाषाण या ताम्र युग के दौरान जीवित थे। 2900 और 2600 ईसा पूर्व के बीच के लोगों के शरीर में मरक्यूरी का उच्च स्तर पाया गया है। यूनिवर्सिटी ऑफ नॉर्थ कैरोलिना विलमिंगटन के नेतृत्व में वैज्ञानिकों की एक टीम ने इंसानों को जहर देने की गुत्थी का निष्कर्ष निकाला है। वैज्ञानिकों का दावा है कि सिनाबार (cinnabar) के संपर्क में आने से इंसानों के शरीर में जहर पहुंचा। सिनाबार एक मरक्यूरी सल्फाइड खनिज है जो दुनिया भर में थर्मल और ज्वालामुखी क्षेत्रों में स्वाभाविक रूप से बनता है। तोड़े जाने पर यह लाल पाउडर में बदल जाता है। पेंट और ड्रग्स के रूप में होता था इस्तेमालऐतिहासिक रूप से इस पाउडर का इस्तेमाल पेंट में पिगमेंट बनाने के लिए किया जाता था। इसके अलावा 'मैजिक' ड्रग्स के रूप में भी इसका सेवन किया जाता था। शोधकर्ताओं ने इंटरनेशनल जर्नल ऑफ ऑस्टियोआर्कियोलॉजी में प्रकाशित अध्ययन में शेयर किया है कि आइबेरिया में पिगमेंट, पेंट या ड्रग्स के रूप में सिनाबार का इस्तेमाल पुरापाषाण काल से शुरू हुआ और नवपाषाण और ताम्र युग में धीरे-धीरे तेज हो गया। पाउडर सूंघने से हुई थी मौतेंयह रिसर्च पूरे स्पेन और पुर्तगाल में 23 पुरातात्विक स्थलों में स्थित 50 कब्रों से इकट्ठा की गई 370 मानव हड्डियों के आधार पर की गई है। शोधकर्ताओं के अनुसार मृत लोगों ने गलती से पाउडर को सूंघ लिया होगा या उसका सेवन किया होगा। जिससे उनकी हड्डियों में पारा का स्तर असामान्य रूप से बढ़ गया था। इनमें कुछ व्यक्तियों की हड्डियों में 400 पार्ट प्रति मिलियन (पीपीएम) तक का स्तर दर्ज किया गया है। कितना होना चाहिए मरक्यूरी का स्तर?प्राचीन हड्डियों में मरक्यूरी के स्तर का अंदाजा विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानक से लगाया जा सकता है। डब्ल्यूएचओ वर्तमान में मानता है कि बालों में पारा का सामान्य स्तर 1 या 2 पीपीएम से अधिक नहीं होना चाहिए। अल्माडेन सिनाबार का इस्तेमाल 7000 साल पहले नवपाषाण काल में शुरू हुआ था। लेकिन ताम्र युग की शुरुआत में इस खनिज ने समाज में एक अहम जगह बना ली। प्रचीन समय में बनाए गए मकबरों को सिनाबार से ही पेंट किया जाता था।


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