Guru Purnima 2021 : गुरु पूर्णिमा का पर्व पूरे भारत में अत्यंत ही श्रद्धा से मनाया जाता है। दरअसल हिंदू कैलेंडर का चौथा मास आषाढ़ मास की Purnima पूर्णिमा Vyas Purnima 'व्यास पूर्णिमा / गुरु पूर्णिमा' कहलाती है।
गुरु के प्रति आदर-सम्मान और अपनी कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए ही हर वर्ष Aashan month आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को Guru Purnima an special parv गुरु पूर्णिमा का विशेष पर्व मनाया जाता है। इस दिन गुरुओं की पूजा व सम्मान करने के बाद उनका आशीर्वाद प्राप्त किया जाता है।
वैसे तो व्यास नाम के कई विद्वान हुए हैं, लेकिन author of mahabharat महाभारत Mahanarat के रचयिता Krishna Dwaipayana Vyasa Rishi कृष्ण द्वैपायन व्यास ऋषि जो चारों वेदों के प्रथम व्याख्याता थे, की इसी दिन उनकी पूजा की जाती है। हमें वेदों का ज्ञान देने वाले व्यासजी ही थे।
इस तरह से जहां उन्हें आदिगुरु माना जाता है, वहीं इसी दिन इनका जन्मदिन भी माना जाता है। ऐसे में उनकी स्मृति को बनाए रखने के लिए हमें इस दिन अपने-अपने गुरुओं को व्यासजी का अंश मानकर उनकी पूजा करनी चाहिए।
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वहीं Special glory of Guru in scriptures शास्त्रों में भी गुरु की विशेष महिमा बताई गई है। गुरु के बिना ज्ञान की प्राप्ति नहीं होती है और ज्ञान ही हर प्रकार के अंधकार को दूर कर सकता है। आषाढ़ मास में गुरु पूर्णिमा Guru purnima का पर्व मनाया जाता है.
ऐसे में इस साल 2021 में आषाढ़ मास की पूर्णिमा की तिथि पर 24 जुलाई 2021 को गुरु पूर्णिमा का पर्व मनाया जाएगा। इसके अलावा Special significance of Ashadh month आषाढ़ मास का शास्त्रों में विशेष महत्व बताया गया है साथ ही पूजा पाठ की दृष्टि से भी ये मास विशेष माना गया है।
Guru Purnima 2021 Date & Muhurat: गुरु पूर्णिमा कब है?
गुरु पूर्णिमा: शनिवार, 24 जुलाई 2021
पूर्णिमा तिथि शुरु: 23 जुलाई, शुक्रवार : 10:43 AM से
पूर्णिमा तिथि का समापन: 24 जुलाई, शनिवार : 08:06 AM तक
जानकारों के अनुसार दरअसल प्राचीन काल में जब विद्यार्थी गुरु के आश्रम में नि:शुल्क शिक्षा ग्रहण करने जाते थे, तो इसी दिन वे श्रद्धाभाव से प्रेरित होकर अपने worship of guru गुरु की पूजा किया करते थे और उन्हें यथाशक्ति दक्षिणा अर्पित करते थे। पंडितों व जानकारों के अनुसार इस दिन केवल गुरु को ही नहीं बल्कि कुटुम्ब में अपने से जो बड़ा है यानि माता-पिता, भाई-बहन आदि को भी गुरुतुल्य समझाना चाहिए।
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Guru Pujan Vidhi: ऐसे करें गुरु का पूजन
इस दिन (गुरु पूर्णिमा) प्रात:काल स्नान पूजा आदि नित्यकर्मों से निवृत्त होकर उत्तम व शुद्ध वस्त्र धारण कर गुरु के पास जाना चाहिए। उन्हें ऊंचे सुसज्जित आसान पर बैठाकर पुष्पमाला पहनानी चाहिए। इसके बाद वस्त्र,फल, फूल व माला अर्पित कर धन भेंट करना चाहिए।
माना जाता है कि इस तरह Guru Pujan श्रद्धापूर्वक पूजन करने से गुरु का आशीर्वाद प्राप्त होता है। और गुरु के आशीर्वाद से ही विद्यार्थी को विद्या आती है। जिससे असके ह्दय का अज्ञानांधकार दूर होता है। गुरु का आशीर्वाद ही प्राणीमात्र के लिए कल्याणकारी, ज्ञानवर्धक और मंगल करने वाला होेता है।
Indian tradition भारतीय संस्कृति के अनुसार संसार की संपूर्ण विद्याएं गुरु की कृपा से ही प्राप्त होती है और गुरु के आशीर्वाद से ही दी हुई विद्या सिद्ध और सफल होती है। जानकारों के अनुसार इस पर्व को श्रद्धापूर्वक मनाना चाहिए, न की अंधविश्वास के आधार पर। गुरु पूजन का मंत्र इस प्रकार है...
' गुरु ब्रह्मा गुरुर्विष्णु: गुरु देवो महेश्वर:।।
गुरु साक्षात परब्रह्म तस्मैश्री गुरुवे नम:।।
What is Purnima: ऐसे समझें पूर्णिमा को
जानकारों के अनुसार चांद का धरती के जल से संबंध है। जब पूर्णिमा आती है तो Sea tides समुद्र में ज्वार-भाटा उत्पन्न होता है, क्योंकि चंद्रमा समुद्र के जल को ऊपर की ओर खींचता है। मानव के शरीर में भी लगभग 85 प्रतिशत जल रहता है। पूर्णिमा के दिन इस जल की गति और गुण बदल जाते हैं।
वैज्ञानिकों के अनुसार इस दिन चन्द्रमा का प्रभाव काफी तेज होता है इन कारणों से शरीर के अंदर रक्त में न्यूरॉन सेल्स क्रियाशील हो जाते हैं और ऐसी स्थिति में इंसान ज्यादा उत्तेजित या भावुक रहता है।
एक बार नहीं, प्रत्येक पूर्णिमा को ऐसा होता रहता है तो person's future व्यक्ति का भविष्य भी उसी अनुसार बनता और बिगड़ता रहता है। पूर्णिमा की रात मन ज्यादा बेचैन रहता है और नींद कम ही आती है। कमजोर दिमाग वाले लोगों के मन में आत्महत्या या हत्या करने के विचार बढ़ जाते हैं।
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What not to do on this day: क्या न करें इस दिन
- इस दिन किसी भी प्रकार की तामसिक वस्तुओं का सेवन नहीं करना चाहिए।
- इस दिन शराब आदि नशे से भी दूर रहना चाहिए। इसके शरीर पर ही नहीं, आपके भविष्य पर भी दुष्परिणाम हो सकते हैं।
- जानकार लोग तो यहां तक कहते हैं कि चौदस, पूर्णिमा और प्रतिपदा इन 3 दिन पवित्र बने रहने में ही भलाई है।
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