कोरोना की दूसरी लहर से मची तबाही ने गिरा दिया भारतीयों का कॉन्फिडेंस, देखिए RBI सर्वे के आंकड़े!

Second wave of Covid-19: भारत में कंज्यूमर्स का कॉन्फिडेंस (Consumer Confidence) तेजी से गिरा है और अपने न्यूनतम स्तर पर पहुंच गया है। 2016 में भारतीय रिजर्व बैंक ने सर्वे के जरिए कंज्यूमर कॉन्फिडेंस का आकलन करना शुरू किया था। कोरोना महामारी की दूसरी लहर का अर्थव्यवस्था और रोजगार पर बहुत ही बुरा असर (Impact of covid-19 on economy and employment) पड़ा है। रिजर्व बैंक का करंट सिचुएशन इंडेक्स (Current Situation Index) जुलाई 2019 से ही निगेटिव है और मई 2021 में तो ये ऑल टाइम लो तक जा पहुंचा है। इस इंडेक्स में रोजगार, कीमतें, आय और पिछले साल की तुलना में खर्चों को आधार बनाकर लोगों की प्रतिक्रिया ली जाती है।

Second wave of Covid-19: रिजर्व बैंक (RBI) का करंट सिचुएशन इंडेक्स (Current Situation Index) जुलाई 2019 से ही निगेटिव है और मई 2021 में तो ये ऑल टाइम लो तक जा पहुंचा है। यानी कंज्यूमर कॉन्फिडेंस (Consumer Confidence) गिर गया है। इसकी वजह है कोरोना वायरस की दूसरी लहर, जिसका इकनॉमी और रोजगार पर बुरा असर (Impact of covid-19 on economy and employment) पड़ा है। ये दूसरी बार है जब भारतीय फ्यूचर एक्सपेक्टेशन इंडेक्स (Future Expectation Index) में निगेटिव साइड गए हैं।


Second wave of Covid-19: कोरोना की दूसरी लहर से मची तबाही ने गिरा दिया भारतीयों का कॉन्फिडेंस, देखिए RBI सर्वे के आंकड़े!

Second wave of Covid-19: भारत में कंज्यूमर्स का कॉन्फिडेंस (Consumer Confidence) तेजी से गिरा है और अपने न्यूनतम स्तर पर पहुंच गया है। 2016 में भारतीय रिजर्व बैंक ने सर्वे के जरिए कंज्यूमर कॉन्फिडेंस का आकलन करना शुरू किया था। कोरोना महामारी की दूसरी लहर का अर्थव्यवस्था और रोजगार पर बहुत ही बुरा असर (Impact of covid-19 on economy and employment) पड़ा है। रिजर्व बैंक का करंट सिचुएशन इंडेक्स (Current Situation Index) जुलाई 2019 से ही निगेटिव है और मई 2021 में तो ये ऑल टाइम लो तक जा पहुंचा है। इस इंडेक्स में रोजगार, कीमतें, आय और पिछले साल की तुलना में खर्चों को आधार बनाकर लोगों की प्रतिक्रिया ली जाती है।



दूसरी बार फ्यूचर एक्सपेक्टेशन इंडेक्स में लोग गए निगेटिव साइड
दूसरी बार फ्यूचर एक्सपेक्टेशन इंडेक्स में लोग गए निगेटिव साइड

ये दूसरी बार है जब भारतीय फ्यूचर एक्सपेक्टेशन इंडेक्स (Future Expectation Index) में निगेटिव साइड गए हैं। इसमें आर्थिक स्थिति, रोजगार और एक साल में लोगों की कमाई को लेकर उनकी राय जानी जाती है। पिछली बार भारतीय भविष्य को लेकर मई 2020 में निगेटिव साइड गए थे, जब कोरोना की वजह से लगा लॉकडाउन बढ़ाया गया था। दो महीने पहले किए गए सर्वे में कंज्यूमर हर क्षेत्र में निगेटिव साइड गए थे, सिवाय खर्चों के। वह अभी भी खर्चों के लेकर पॉजिटिव हैं, लेकिन पिछले दो महीनों की तुलना में आंकड़ा कम है।



जरूरी चीजों पर भी कम खर्च कर रहे लोग
जरूरी चीजों पर भी कम खर्च कर रहे लोग

अर्थशास्त्रियों के अनुसार कमजोर होती मांग की वजह से ही मॉनिटरी पॉलिसी कमेटी ने ग्लोबल स्तर पर तमाम चीजों की बढ़ती महंगाई को अनदेखा करने का फैसला किया। रिजर्व बैंक के अनुसार महंगाई तभी बनी रहेगी, अगर मांग अधिक होती है। रिजर्व बैंक ने कहा है कि लोगों ने खर्चों को कम किया है। गैर-जरूरी चीजों पर तो लोग कम खर्च कर ही रहे हैं, जरूरी चीजों पर होने वाले खर्च को भी कम कर रहे हैं।



इन 13 बड़े शहरों में हुआ था ये सर्वे
इन 13 बड़े शहरों में हुआ था ये सर्वे

71 फीसदी लोगों ने सर्वे में कहा कि वह मार्च 2021 में जरूरी चीजों पर उनका खर्च बढ़ा है, लेकिन सिर्फ 63 फीसदी ने ही मई में खर्चे बढ़ाए हैं। रिजर्व बैंक ने कंज्यूमर कॉन्फिडेंस सर्वे 29 अप्रैल से 10 मई के बीच 13 बड़े शहरों में किया था। ये शहर अहमदाबाद, बेंगलुरु, भोपाल, चेन्नई, दिल्ली, गुवाहाटी, हैदराबाद, जयपुर, कोलकाता, लखनऊ, मुंबई, पटना और तिरुवनंतपुरम हैं।





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