नई दिल्ली उत्तराखंड में अगले साल की शुरूआत में विधानसभा चुनाव होने हैं। बीजेपी चुनाव की तैयारियों और इसकी रणनीति को लेकर जल्द ही चिंतन बैठक करेगी। बीजेपी के एक नेता के मुताबिक इसी महीने चिंतन बैठक हो सकती है। इसमें सीएम चेहरे के साथ चुनाव लड़ा जाए या फिर संयुक्त नेतृत्व में, फिर से सत्ता वापसी कैसे हो, सहित कई मसलों पर चर्चा हो सकती है। बीजेपी नेताओं का मंथनबीजेपी नेता के मुताबिक चिंतन बैठक में उन सभी मसलों पर बात होगी जो किसी भी नेता के दिमाग में हैं और चुनाव में असर डाल सकते हैं। बीजेपी के उत्तराखंड प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक ने एनबीटी से बात करते हुए कहा कि कुछ दिन पहले राष्ट्रीय संगठन मंत्री जब तीन दिन के दौरे पर आए थे तब कोरोना और इससे जूझ रहे लोगों को राहत किस तरह पहुंचाई जा रही है, उससे जुड़े मसलों पर ही बात हुई थी। उन्होंने कहा कि चिंतन बैठक में चुनाव पर चर्चा होगी। बीजेपी ने कोविड महामारी के दौर में लोगों से जुड़ने के लिए कार्यक्रम भी तय किए हैं। कौशिक ने कहा कि जैसे जैसे उत्तराखंड में जो जिला कोरोना मुक्त घोषित होगा, हम वहां फ्रंट लाइन वर्कर्स को सम्मानित करेंगे। बीजेपी के लिए चुनौतीउत्तराखंड में इस बार का चुनाव बीजेपी के लिए इसलिए भी चुनौती है क्योंकि उत्तराखंड का अब तक का इतिहास रहा है कि यहां हर पांच साल में सत्ता बदलती है। बीजेपी अभी सत्ता में है तो सत्ता विरोधी लहर भी है। बीजेपी इससे कैसे पार पाएगी इस पर भी चिंतन बैठक में चर्चा की जाएगी। उत्तराखंड बीजेपी के भीतर गुटबाजी कोई सीक्रेट नहीं है। चुनाव से पहले इससे निपटना और एकजुट चेहरा दिखाना भी बीजेपी के लिए चुनौती है। किसका चेहरा लेकर उतरेगी बीजेपी?बीजेपी ने कुछ वक्त पहले ही अपना सीएम बदला है क्योंकि बीजेपी के विधायक ही बगावत पर उतर आए थे। सीएम बदलने के दौरान भी कई नेता खुद के सीएम बनने की उम्मीद लगाए बैठे थे। लेकिन बीजेपी ने गढ़वाल के एक रावत को हटाकर दूसरे रावत को सीएम बना दिया। इससे कुमांऊ के नेताओं में नाराजगी भी दिखी। हालांकि बीजेपी ने इसे बैलेंस करने की कोशिश की लेकिन चुनाव के वक्त फिर इसका असर दिख सकता है। बीजेपी के भीतर इस पर चर्चा चल रही है कि क्या तीरथ सिंह रावत को सीएम चेहरा बनाकर ही चुनाव में उतरा जाएगा? असम प्रयोग के साथ उतर सकती है बीजेपीसीएम बनने के बाद से तीरथ सिंह कई ऐसे बयान दे चुके हैं जिससे पार्टी को फजीहत का सामना करना पड़ा है। यह भी चर्चा है कि क्या उत्तराखंड चुनाव में पार्टी संयुक्त नेतृत्व में मैदान में उतरेगी। बीजेपी ने असम में भी यही किया था। वहां बीजेपी का सिटिंग सीएम होने के बावजूद बीजेपी ने इसका ऐलान नहीं किया था कि जीतने के बाद कौन सीएम होगा। फिर चुनाव जीतने पर सीएम बदल दिया गया। बीजेपी के कई नेता यह उम्मीद लगा रहे हैं कि उत्तराखंड में भी यही होगा।
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