'विज्ञान नारी-पुरुष में अंतर नहीं करता, सिर्फ काम मायने रखता है'- सदियों से जो समाज महिलाओं की काबिलियत को कम आंकता रहा, भारतीय महिला वैज्ञानिकों ने देश के कदमों में ऐतिहासिक सफलताएं रखकर उस समाज को सटीक जवाब दिया है। जमीन पर भारत की शक्ति को धार देनी हो या अंतरिक्ष में तिरंगा झंडा पहुंचाना हो, इन महिलाओं ने साबित किया है कि अपने देश में अप्रतिम बुद्धिमता के आड़े संकीर्ण मानसिकता टिक नहीं सकती। इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (ISRO) के साथ अग्नि मिसाइल से जुड़ीं टेसी थॉमस, चंद्रयान और मंगलयान से जुड़ीं मुथैया वनीता और ऋतु करीधल इस बात की मिसाल हैं कि जब स्वाति मोहन जैसी भारतीय मूल की महिलाएं पश्चिमी देशों में अपना लोहा मनवा रही हैं, तब अंतरिक्ष से जुड़े सवालों के जवाब खोजने में ISRO के अंदर ये साइंटिस्ट किस तरह मोर्चा संभाल रही हैं।Indian Women Scientists: भारतीय महिला वैज्ञानिकों ने दशकों से साबित किया है कि विज्ञान के क्षेत्र में सिर्फ इंसान की काबिलियत काम आती है। अग्नि मिसाइल हो, चांद पर जाने का मिशन या मंगल पर जीवन की खोज, भारतीय महिला वैज्ञानिक हमेशा आगे रही हैं।

'विज्ञान नारी-पुरुष में अंतर नहीं करता, सिर्फ काम मायने रखता है'- सदियों से जो समाज महिलाओं की काबिलियत को कम आंकता रहा, भारतीय महिला वैज्ञानिकों ने देश के कदमों में ऐतिहासिक सफलताएं रखकर उस समाज को सटीक जवाब दिया है। जमीन पर भारत की शक्ति को धार देनी हो या अंतरिक्ष में तिरंगा झंडा पहुंचाना हो, इन महिलाओं ने साबित किया है कि अपने देश में अप्रतिम बुद्धिमता के आड़े संकीर्ण मानसिकता टिक नहीं सकती। इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (ISRO) के साथ अग्नि मिसाइल से जुड़ीं टेसी थॉमस, चंद्रयान और मंगलयान से जुड़ीं मुथैया वनीता और ऋतु करीधल इस बात की मिसाल हैं कि जब स्वाति मोहन जैसी भारतीय मूल की महिलाएं पश्चिमी देशों में अपना लोहा मनवा रही हैं, तब अंतरिक्ष से जुड़े सवालों के जवाब खोजने में ISRO के अंदर ये साइंटिस्ट किस तरह मोर्चा संभाल रही हैं।
'अग्निपुत्री' टेसी थॉमस

भारत की मिसाइलों के बारे में बात होती है तो सबसे पहले शायद ख्याल आता है पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम आजाद का जिन्हें 'मिसाइल मैन ऑफ इंडिया' कहा जाता है। हालांकि, अग्नि मिसाइल सीरीज ने भारत को 'अग्नि पुत्री' भी दी है जो कलाम को अपना गुरु मानती हैं। टेसी थॉमस ने पुरुषों का क्षेत्र मान जाने वाले हथियारों और परमाणु क्षमता से लैस मिसाइलों के विकास में इतिहास रचा जब वह भारत के मिसाइल प्रॉजेक्ट को हेड करने वाली पहली महिला बनीं। मिसाइल गाइडेंस में डॉक्टरेट टेसी अग्नि प्रोग्राम से डिवेलपमेंटल फ्लाइट्स के वक्त से ही जुड़ी थीं। उन्होंने अग्नि मिसाइलों में लगी गाइडेंस स्कीम को डिजाइन किया है। वह कहती हैं कि साइंस का कोई जेंडर नहीं होता।
वनीता मुथैया- चंद्रयान-2

मुथैया वनीता और इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (ISRO) का साथ 40 साल से भी ज्यादा पुराना है। इस दौरान वनीता ने कई उंचाइयों को छुआ और ISRO को भी आगे लेकर गईं। उन्होंने साल 2013 में मंगलयान के लॉन्च और सफलता में अहम भूमिका निभाई थी। भारत के महत्वाकांक्षी चंद्रयान-2 मिशन के साथ वह ISRO की पहले महिला प्रॉजेक्ट डायरेक्टर बनीं तो 'तीसरी दुनिया' का देश कहे जाने वाले भारत ने साबित कर दिया कि हमारे देश की महिलाएं दुनिया के किसी भी देश से पीछे नहीं हैं। इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम इंजिनियर वनीता इससे पहले देश की रिमोट सेंसिंग सैटलाइट्स के डेटा ऑपरेशन्स को भी संभाल चुकी हैं। उनके बारे में कहा जाता है कि कोई भी समस्या या पहेली हो, उनके सामने टिक नहीं सकती। वनीता को साल 2006 में ऐस्ट्रोनॉटिकल सोसायटी ऑफ इंडिया ने बेस्ट वुमन साइंटिस्ट अवॉर्ड दिया था।
ऋतु करिधल-मंगलयान

भारत की रॉकेट वुमन ऋतु करिधल। मंगलयान के लिए 2013-2014 में डेप्युटी ऑपरेशन्स डायरेक्टर रहीं ऋतु ने चंद्रयान-2 मिशन के लिए डायरेक्टर का पद संभाला। चंद्रयान-2 के ऑनवर्ड ऑटोनॉमी सिस्टम को डिजाइन करना ऋतु के जिम्मे थे। IISC बेंगलुरु से एयरोस्पेस इंजिनियरिंग में मास्टर्स ऋतु ने मार्स ऑर्बिटर मिशन के लिए ISRO टीम अवॉर्ड और साल 2007 में तत्कालीन राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम आजाद से ISRO यंग साइंटिस्ट अवॉर्ड का ईनाम भी अपने नाम किया है। ऋतु ने MOM के बारे में बताया था, 'MOM एक बड़ा चैलेंज था। हमें 18 महीने में इसकी तैयारी करनी थी। यह पहली इंडियन सैटलाइट थी जिसमें फुल-स्केल ऑन बोर्ड ऑटोनॉमी थी जो खुद अपनी परेशानी सुलझा सके। सबसे अहम महिला वैज्ञानिकों ने पुरुष वैज्ञानिकों के कंधे से कंधा मिलाकर इस मिशन को सफल बनाया था।'
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