किसान नेता राकेश टिकैत ने पहले उकसाया, अब हुड़दंग पर दे रहे मासूम जवाब

नई दिल्ली दिल्ली में किसानों के उपद्रव के बाद उनकी अगुआई करने वाले किसान नेताओं के सुर अब बदले-बदले से हैं। ट्रैक्टर मार्च से पहले 'लाठी-डंडे साथ लाओ' वाला बयान देने वाले ये किसान नेता राकेश टिकैत उपद्रव पर सफाई देते दिखे। टिकैत ने माना कि उन्होंने किसानों को डंडे-झंडे के साथ दिल्ली पहुंचने को कहा था, लेकिन साथ ही जोड़ा कि मकसद हंगामा खड़ा करना नहीं था। उन्होंने उपद्रवियों का बचाव करते हुए कहा कि ट्रैक्टर चला रहे किसान अनपढ़ थे, उन्हें दिल्ली का रास्ता तक पता नहीं था। टिकैत ने वीडियो संदेश में किसानों को कैसे भड़काया, जानें भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा, "हां, हमने उन्हें डंडे लाने को कहा था। कृपया बिना डंडे का एक भी झंडा दिखा दें तो मैं अपनी गलती मान लूं।" दरअसल, टिकैत का वह भड़काऊ वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है जिसमें वो किसानों से कह रहे हैं कि अब उनकी जमीन नहीं बचने वाली है। 30 सेकंड के वीडियो में टिकैत ने कहा, "सरकार मान नहीं रही, ज्यादा कहनी पड़ रही है। अपना ले अइयो झंडा-झुंडा भी लागाना, लाठी-गोटी भी साथ रखियो अपनी। झंडा लगाने के लिए आओ, समझ जइयो सारी बात। ठीक है? झंडा, लगेगा तिरंगा भी झंडा और ऐसा भी लगा लियो उसपे। और आ जाओ बस अब, बहुत हो लिया। आ जाओ जमीन बचाने के लिए, आ जाओ अपनी जमीन नहीं बच रही।" समझ लें टिकैत के इशारों का मतलब टिकैत जब 'अपना ले अइयो झंडा-झुंडा भी लागाना, लाठी-गोटी भी साथ रखियो अपनी। झंडा लगाने के लिए आओ, समझ जइयो सारी बात। ठीक है?' कहते हैं तो साफ है कि वो इशारों में किसानों से कह रहे हैं कि झंडा-झुंडा के साथ-लाठी-गोटी लाने के पीछे का मतलब समझ लें। साफ है कि वो चालाकी दिखा रहे हैं और मूलतः किसानों को लाठी-डंडे लेकर ही आने को कह रहे हैं, झंडे की बात इसलिए कर रहे हैं ताकि उपद्रव के बाद सफाई देने का रास्ता बन सके। बिल्कुल प्लानिंग के साथ बढ़ रहे हैं टिकैत राकेश टिकैत अपनी प्लानिंग के अनुसार ही अब अपने बयान को मान भी रहे हैं और उस पर सफाई भी दे रहे हैं। वो अपनी सफाई में यह भी कह रहे हैं कि पंजाबी गायक दीप सिद्धू से भी उनका कोई लेना-देना नहीं है। वो तो यहां तक कह रहे हैं कि सिद्धू सिख भी नहीं है बल्कि वो बीजेपी के कार्यकर्ता हैं। उन्होंने कहा, "उनकी (दीप सिद्धू की) तस्वीर प्रधानमंत्री के साथ है। यह किसानों का आंदोलन है और ऐसा ही रहेगा। कुछ लोगों को यह जगह तुरंत छोड़कर जाना होगा- जिन्होंने बैरिकेड तोड़े, वो कभी आंदोलन के हिस्सा नहीं हो पाएंगे।" मासूमियत से आंखों में धूल झोंकने की कोशिश टिकैत ने कहा, "जिन्होंने भी हिंसा की और लाल किला पर झंडे फहराए, उन्हें अपने किए की सजा भुगतनी होगी। पिछले दो महीनों से एक खास कौम के खिलाफ साजिश चल रही है। यह सिखों का नहीं बल्कि किसानों का आंदोलन है।" टिकैत दिल्ली में उपद्रव करवाने के बाद कितनी मासूमियत का दिखावा कर रहे हैं, इसका अंदाजा उनके एक और बयान में लगाया जा सकता है। वो अपने बयान में ट्रैक्टर चालकों को अनपढ़ कहकर सारी हरकतों पर पर्दा डालने की कोशिश करने लगे हैं। उन्होंने कहा, "अनपढ़ लोग ट्रैक्टर चला रहे थे, उन्हें दिल्ली के रास्तों का पता नहीं था। प्रशासन ने उन्हें दिल्ली की तरफ जाने को कहा। वो दिल्ली जाकर घर लौट आए। उनमें से कुछ नासमझी में रास्ता भटककर लाला किला पहुंच गए। पुलिस ने उन्हें वापस भेजा।"


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