इंटरनैशनल स्पेस स्टेशन के लिए NASA (नैशनल ऐरोनॉटिकल ऐंड स्पेस ऐडमिनिस्ट्रेशन) के सेंटर से Northrop Grumman Antares रॉकेट लॉन्च हुआ है। भारत की पहली महिला अंतरिक्षयात्री कल्पना चावला के नाम से गए इस Cygnus कार्गो स्पेसक्राफ्ट के साथ जाने वाले आइटम्स में से एक स्पेस टॉइलट है जिसे पहले यूनिवर्सल वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम कहते थे। 23 मिलियन डॉलर यानी 174 करोड़ रुपये से ज्यादा के बजट से यह टॉइलट इसलिए डिजाइन किया गया था ताकि महिलाओं को स्पेस में आसानी हो सके। यह सिस्टम सफल होता है तो स्पेस में महिलाओं के लिए स्पेस को और सुविधाजनक बनाने की दिशा में यह ऐतिहासिक कदम होगा। टॉइलट की कमी की वजह से महिलाओं के लिए स्पेस में जाना लंबे वक्त तक मुश्किल काम करा।NASA Space Toilet: अमेरिका की स्पेस एजेंसी NASA ने अंतरिक्ष में टॉइलट भेजा है जिसकी कीमत 174 करोड़ रुपये है। यह टॉइलट इसलिए डिजाइन की गई है ताकि स्पेस में महिलाओं को आसानी हो सके। नासा 2024 में महिला ऐस्ट्रोनॉट को चांद पर भेजना चाहता है। ऐसे में स्पेस टॉइलट की अहमियत ज्यादा है।

इंटरनैशनल स्पेस स्टेशन के लिए NASA (नैशनल ऐरोनॉटिकल ऐंड स्पेस ऐडमिनिस्ट्रेशन) के सेंटर से Northrop Grumman Antares रॉकेट लॉन्च हुआ है। भारत की पहली महिला अंतरिक्षयात्री कल्पना चावला के नाम से गए इस Cygnus कार्गो स्पेसक्राफ्ट के साथ जाने वाले आइटम्स में से एक स्पेस टॉइलट है जिसे पहले यूनिवर्सल वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम कहते थे। 23 मिलियन डॉलर यानी 174 करोड़ रुपये से ज्यादा के बजट से यह टॉइलट इसलिए डिजाइन किया गया था ताकि महिलाओं को स्पेस में आसानी हो सके। यह सिस्टम सफल होता है तो स्पेस में महिलाओं के लिए स्पेस को और सुविधाजनक बनाने की दिशा में यह ऐतिहासिक कदम होगा। टॉइलट की कमी की वजह से महिलाओं के लिए स्पेस में जाना लंबे वक्त तक मुश्किल काम करा।
6 साल में बनकर तैयार

इस खास टॉइलट को बनाने में 6 साल लगे हैं। अब तक महिलाओं के स्पेस में जाने में यह एक बड़ी चुनौती हुआ करती थी कि वहां उनके मुताबिक टॉइलट नहीं होते लेकिन महिला ऐस्ट्रोनॉट्स की संख्या बढ़ने के साथ आखिरकार यह अहम जरूरत पूरी होने वाली है। अभी तक स्पेस में इस्तेमाल की जा रही माइक्रोग्रैविटी टॉइलट (तस्वीर में) पुरुष ऐस्ट्रोनॉट्स को ध्यान में रखकर बनाए जाते थे लेकिन जैसे-जैसे महिला ऐस्ट्रोनॉट्स की संख्या बढ़ती गई, खास टॉइलट की जरूरत महसूस की जाने लगी।
पहले के मुकाबले यूं अलग

खासकर तब जब 2024 तक चांद पर Artemis Mission के तहत एक महिला और एक पुरुष को भेजे जाने की तैयारी है। ISS पर इसका टेस्ट Artemis के लिए अहम होगा। इस टॉइलट में महिलाओं के लिए फनल-सक्शन सिस्टम होगा और ऐस्ट्रोनॉट्स खुद को बेतर तरीके से फिट कर सकें, इसके लिए स्पेशल डिजाइन बनाई गई है। पहले के सिस्टम्स के मुकाबले इसका द्रव्यमान (Mass) और आयतन (Volume) कम होगा और इसे इस्तेमाल करना भी आसान होगा। यही नहीं, इसमें यूरिन (Urine) ट्रीटमेंट की सुविधा भी होगी जिससे स्पेसक्राफ्ट के रीसाइक्लिंग सिस्टम में इसे प्रॉसेस किया जा सकेगा। सीट पर बैठते वक्त ऐस्ट्रोनॉट्स के पैर फंसाने के लिए खास हुक भी लगे होंगे।
महिलाओं के लिए टॉइलट बनाना था चुनौती

स्पेसक्राफ्ट में वेस्ट कलेक्शन सिस्टम डिवेलप करना गुरुत्वाकर्षण (Gravity) की वजह से एक बड़ी चुनौती होता है। खासकर पेशाब और मल (Urine और Faeces) को अलग करके रखना मुश्किल होता है। यूरिन का इस्तेमाल जहां रीसाइकल करने के बाद पीने के पानी के तौर पर किया जाता है, वहीं मल को कंटेनर में रखा जाता है। पहले के डिजाइv पुरुष यात्रियों को ध्यान में रखकर बनाए जाते थे लेकिन शारीरिक संरचना में अंतर की वजह से यूनिसेक्स टॉइलट (महिला और पुरुष, दोनों के लिए) बनाना एक बड़ी चुनौती थी।
from World News in Hindi, दुनिया न्यूज़, International News Headlines in Hindi, दुनिया समाचार, दुनिया खबरें, विश्व समाचार | Navbharat Times https://ift.tt/3l70S3S