येरेवान/बाकू अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हस्तक्षेप के बाद आर्मीनिया और अजरबैजान के हुआ मानवीय युद्धविराम अब खत्म होता नजर आ रहा है। आर्मीनिया और अजरबैजान दोनों ने ही एक-दूसरे पर भीषण हमले करने का आरोप लगाया है। अजरबैजान की सरकार ने कहा है कि नागोर्नो-काराबाख के पास आर्मीनिया की ओर से किए गए मिसाइल हमले में 21 लोगों की मौत हो गई है। उधर, आर्मीनिया ने आरोप लगाया है कि अजरबैजान की सेना लगातार रॉकेट से हमले कर रही है जिसमें कई लोग हताहत हुए हैं। आर्मीनिया ने कहा कि अजरबैजान की सेना नागोर्नो-काराबाख के नागरिकों के इलाके में हमले कर रही है। इस बीच रूस की संवाद एजेंसी रिया नोवोस्ती ने आर्मीनिया के प्रधानमंत्री के हवाले से इस बात की पुष्टि की है कि रूसी सीमा रक्षक नागोर्नो-काराबाख में आर्मीनिया की सीमा पर तैनात किए गए हैं। आर्मीनिया के पीएम ने कहा कि रूसी सीमा रक्षकों की तैनाती में कुछ भी विशेष नहीं है। 'आर्मीनियाई सैनिकों ने बर्दा में स्मर्च मिसाइलें दागीं' आर्मीनिया के प्रधानमंत्री निकोल पशिनयान ने कहा, 'रूसी बार्डर गार्ड आर्मीनिया की तुर्की और ईरान की लगती सीमा पर मौजूद हैं। अब इस ताजा घटनाक्रम के बाद रूसी बार्डर गार्ड्स को देश की दक्षिणी पूर्वी और दक्षिणी-पश्चिमी सीमा पर तैनात किया गया है।' बुधवार को हुई लड़ाई आर्मीनिया और अजरबैजान के बीच ट्रंप के मानवीय संघर्ष विराम कराए जाने के बाद हुई है। अजरबैजान के राष्ट्रपति के सहायक हिकमेट हजियेव ने कहा कि आर्मीनियाई सैनिकों ने बर्दा में स्मर्च मिसाइलें दागीं। यही नहीं आर्मीनिया की सेना ने क्लस्टर बम का इस्तेमाल किया जिससे बड़ी संख्या में आम नागरिक मारे गए हैं। अजरबैजान ने कहा कि इस हमले में 21 आम नागरिक मारे गए हैं और कम से कम 70 अन्य घायल हो गए हैं। उधर, आर्मीनिया ने आरोप लगाया है कि उसकी सेना कुछ जगहों से जानबूझकर पीछे हटी है और वहां पर अब अजरबैजान आतंकी अड्डे बना रहा है जिसमें तुर्की उसकी मदद कर रहा है। रूस ने इशारों ही इशारों में तुर्की को गंभीर चेतावनी दी आर्मीनिया ने माना है कि अजरबैजान की फौज ने ईरान से लगते रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण गुबादली कस्बे पर कब्जा कर लिया है। इससे पहले रूस ने इशारों ही इशारों तुर्की, इजरायल समेत अन्य विदेशी ताकतों को गंभीर चेतावनी दी थी। रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लवरोव ने कहा कि इस संकट का राजनयिक समाधान मुमकिन है। उन्होंने सभी विदेशी ताकतों को चेतावनी दी कि वे इसके सैन्य समाधान को बढ़ावा देना बंद कर दें। लवरोव ने कहा कि यह कोई सीक्रेट नहीं है कि हम इस समस्या के सैन्य समाधान की संभावना का समर्थन नहीं करते हैं। तुर्की ने किया था अजरबैजान में सेना भेजने का ऐलान रूसी विदेश मंत्री ने कहा कि हमारा मानना है कि आर्मीनिया और अजरबैजान दोनों ही हमारे मित्र देश हैं। हम सैन्य समाधान के विचार का समर्थन नहीं करते हैं। इससे पहले मध्य एशिया में 'खलीफा' बनने की चाहत रखने वाले तुर्की ने ऐलान किया था कि अगर अजरबैजान की ओर से अनुरोध आया तो वह अपनी सेना को भेजने के लिए तैयार है। सुपरपावर रूस के पड़ोसी देशों आर्मीनिया और अजरबैजान के बीच नागोर्नो-काराबाख इलाके पर कब्जे के लिए जंग चल रही है और अगर तुर्की इसमें शामिल होता है तो तीसरे विश्व युद्ध का खतरा पैदा हो जाएगा।
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