ऐस्टरॉइड से खास 'तोहफा' लाएगा NASA का अंतरिक्ष यान, खोलेगा जीवन के रहस्य

अमेरिका की स्पेस एजेंसी NASAअगले महीने एक और ऐतिहासिक मिशन को अंजाम देने वाली है। OSIRIS-REx प्रोब 20 अक्टूबर को पहली बार किसी ऐस्टरॉइड से सैंपल इकट्ठा करने वाला है। ऐस्टरॉइड Bennu से यह क्राफ्ट धूलऔर कंकड़ के सैंपल लेगा। Bennu उन 22 ऐस्टरॉइड्स में से एक है जिन पर स्पेस एजेंसी आने वाले 100 सालों में नजर रखने वाली है।


ऐस्टरॉइड Bennu से खास 'तोहफा' लाएगा NASA का OSIRIS-REx, खोलेगा जीवन के रहस्य

अमेरिका की स्पेस एजेंसी NASAअगले महीने एक और ऐतिहासिक मिशन को अंजाम देने वाली है। OSIRIS-REx प्रोब 20 अक्टूबर को पहली बार किसी ऐस्टरॉइड से सैंपल इकट्ठा करने वाला है। ऐस्टरॉइड Bennu से यह क्राफ्ट धूलऔर कंकड़ के सैंपल लेगा। Bennu उन 22 ऐस्टरॉइड्स में से एक है जिन पर स्पेस एजेंसी आने वाले 100 सालों में नजर रखने वाली है।



दो साल बाद छुएगा जमीन
दो साल बाद छुएगा जमीन

OSIRIS-REx के प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर डान्टे लॉरेटा इस मिशन के लिए बेहद उत्साहित हैं। उन्हें इस बात का विश्वास है कि वह इस चुनौती के लिए तैयार हैं। यह चुनौती है भी काफी बड़ी। OSIRIS-REx दो साल से Bennu के चक्कर काट रहा है और स्पेस रॉक्स के मूवमेंट को ऑब्जर्व कर रहा है। अब यह Nightingale नाम के क्रेटर पर स्पाइरल करते हुए उतरेगा। यहां इसके उतरने के लिए सिर्फ 8 मीटर चौड़ा एक क्षेत्र हैं जहां इसे लैंडिंग करनी है।



चुनौती है ये लैंडिंग
चुनौती है ये लैंडिंग

यही अपने आप में एक बड़ा काम होगा। इसके आसपास छोटी इमारतों जैसे चट्टानी ढांचे हैं। इनके बीच से छोटे से क्षेत्र में स्पेसक्राफ्ट को संभालकर उतारना मुश्किल होगा। खास बात यह है कि OSIRIS-REx को यह काम अपने आप ही करना होगा। दरअसल, जहां वह है, वहां से धरती के बीच सिग्नल आने-जाने में 18 मिनट का गैप होता है। इसलिए रियल-टाइम में उसे 'पार्क' करना वैज्ञानिकों के लिए मुमकिन नहीं होगा।



क्यों खास है यह क्रेटर?
क्यों खास है यह क्रेटर?

पहले जब धरती पर मौजूद उपकरणों की मदद से Bennu को देखा गया था, तो अंदाजा लगाया गया था कि OSIRIS-REx को लैंड करने के लिए कम से कम 50 मीटर की जगह मिल जाएगी, लेकिन वहां कहीं ज्यादा चट्टानें निकलीं। इसके अलावा Nightingale क्रेटर भी सैंपल के लिहाज से बेहद अहम है। यहां महीने धूल, कंकड़-पत्थर हैं जो ज्यादा वक्त के लिए आसपास के पर्यावरण के संपर्क में नहीं आए हैं।



ऐसे लेगा सैंपल
ऐसे लेगा सैंपल

OSIRIS-REx Nightingale में ज्यादा वक्त नहीं बिताएगा। इसकी एक 3.4 मीटर की रोबॉटिक आर्म पर सैंपलिंग मकैनिज्म लगा है। यह कुछ सेकंड ही सतह को छुएगा। क्रेटर की धूल नाइट्रोजन गैस के ब्लास्ट से उड़ेगी और सैंपलिंग हेड में इकट्ठा हो जाएगी। वैज्ञानिकों को कम से कम 60 ग्राम सैंपल चाहिए। अगर यहां इतनी धूल नहीं मिली तो 30 अक्टूबर को फैसला किया जाएगा कि आगे क्या करना है। दूसरी कोशिश बैकअप साइट Osprey पर जनवरी 2021 के बाद ही की जा सकेगी।



'टाइम कैप्सूल' खोलेगा राज
'टाइम कैप्सूल' खोलेगा राज

अगर सबकुछ ठीक रहा तो OSIRIS-REx Bennu से मार्च 2021 को धरती के लिए उड़ान भरेगा और 24 सितंबर, 2023 को यूटा के रेगिस्तान में लैंड करेगा। इसके लाए सैंपल की मदद से वैज्ञानिक सोलर सिस्टम की शुरुआत के बारे में स्टडी करेंगे। धरती पर जीवन कैसे शुरू हुआ, इसके रहस्य भी ये सैंपल खोल सकते हैं। दरअसल, कई रिसर्चर्स का मानना है कि धरती से ऐस्टरॉइड्स की टक्कर की वजह से ही यहां जीवन पैदा हुआ था। NASA के अधिकारी ऐस्टरॉइड्स को 'टाइम कैप्सूल' कहते हैं क्योंकि वह ग्रहों के साथ ही बचे हुए मटीरियल से बने थे।





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