अयोध्‍या में बनने वाली नई मस्जिद पर 'बाबरी' का कितना असर?

अयोध्या अयोध्या के धन्नीपुर में मस्जिद () निर्माण कार्य के लिए नियुक्त ट्रस्ट ने स्पष्ट किया है कि उनका जोर 'नई शुरुआत' करने पर रहेगा, जो कि ' के ठप्पे के प्रभाव' से मुक्त होगा। पूरे परिसर के लिए आधुनिक डिजाइन का ब्लूप्रिंट के साथ ही गंगा-जमुनी तहजीब और हिंदू-मुस्लिम की साझा विरासत के आइडिया को भी फोकस में रखा जाएगा। सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड को धन्नीपुर में मस्जिद के लिए दी गई पांच एकड़ जमीन पर मस्जिद परिसर तैयार होगा। जाने-माने इतिहासकार और जेएनयू के रिटायर्ड प्रफेसर पुष्पेश पन्त को धन्नीपुर मस्जिद के म्यूजियम और लाइब्रेरी सेक्शन का सलाहकार नियुक्त किया गया है। उन्होंने भी कहा कि अभिलेखागार के जरिए साझा संस्कृति को प्रदर्शित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि कम्युनिटी किचन में खाने के जरिए भी ऐसा ही प्रयास रहेगा। कॉम्पलेक्स में एक हॉस्पिटल भी रहेगा। 'जख्म' की याद दिलाने वाला नहीं होगा नया मस्जिद पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित ने हमारे सहयोगी अखबार इकनॉमिक टाइम्स से बातचीत में कहा, 'आर्काइव्स में लखनऊ नहीं बल्कि अयोध्या-फैजाबाद की संस्कृति को प्रदर्शित किया जाएगा। हम अभी डिजिटल आर्काइव्स की संभावना के साथ ही पॉटरी, चिकनकारी, प्राचीन शिल्प, पांडुलिपि का प्रदर्शन भी करेंगे।' यह पूछे जाने पर कि क्या नई मस्जिद की बनावट में बाबरी मस्जिद के रिप्लेसमेंट की झलक देखने को मिलेगी, पंत ने कहा कि नया मस्जिद 'जख्म' की याद दिलाने वाला नहीं, बल्कि 'आपसी मेल-जोल और समन्वयता' प्रदर्शित करने वाला होना चाहिए। सोहावल तहसील के धन्नीपुर गांव में बनने जा रही मस्जिद का डिजाइन जामिया मिल्लिया इस्लामिया के आर्किटेक्चर डिपार्टमेंट के डीन प्रफेसर एसएम अख्तर तैयार करेंगे। प्रफेसर अख्तर कहते हैं, 'इस्लामी रूह और भारतीयता के साथ मस्जिद को तैयार किया जाएगा, जिसका आधार होगा खिदमत-ए-खल्क यानी इंसानियत की सेवा।' 'बाबरी के ठप्पे' से प्रभावित नहीं होगी नई मस्जिद इंडो इस्लामिक कल्चरल फाउंडेशन (IICF) के प्रवक्ता अतहर हुसैन ने बताया कि औपनिवेशिक काल से पहले के भारतीय-इस्लामिक परंपरा को ध्यान में रखा जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह एक नई शुरुआत होगी और 'बाबरी मस्जिद के ठप्पे' से प्रभावित नहीं होगी। हुसैन ने यह भी स्पष्ट किया कि मस्जिद का नामकरण किसी भी बादशाह या शासक के नाम पर नहीं किया जाएगा। यहां बनने वाला खाना भी सादा ही रहेगा, जिसकी पहुंच सामान्य आदमी तक हो सके। अख्तर हुसैन ने कहा कि जहां जमीन है, उस इलाके में कॉम्प्लेक्स में एक मल्टिस्पेशिएलिटी या सुपरस्पेशिएलिटी हॉस्पिटल बनेगा। एक कल्चरल एजुकेशनल हब भी बनेगा, जो फॉर्मल एजुकेशन को नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, इतिहास, दर्शन को लेकर जागरूक करने का काम करेगी।


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