एम्स में घर जाने की जिद पर अड़े बंगाली मजदूरों ने किया हंगामा, पुलिस को दौड़ाया

बठिंडा के एम्स अस्पताल में बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन में लगे 600 के करीब प्रवासी मजदूर शनिवार को प्रदर्शन पर उतर आए। पिछले 3 महीने से मजदूरी नहीं मिलने के चलते इन लोगों ने हंगामा किया। इन लोगों का कहना है कि पहले तो उनको तनख्वाह नहीं मिल रही है और ऊपर से आज पुलिस ने इन पर लाठियां भांजी। इन लोगों में ज्यादातर पश्चिमी बंगाल, झारखंड, उत्तर प्रदेश और बिहार के रहने वाले हैं और ये अपने घर जाना चाहते हैं। प्रदर्शन की खबर पाकर पुलिस बल मौके पर पहुंचा तो वहां पुलिस और लेबर के बीच झड़प हो गई। लेबर ने पुलिस पर पत्थर भी बरसाए। भीड़ को देखते हुए पुलिस ने अपनीगाड़ी भगाई तो मजदूर पुलिस के पीछे भागते नजर आए।

मिली जानकारी के अनुसार बिहार व झारखंड के मजदूरों के घर लौटने के बाद एम्स में काम कर रहे पश्चिम बंगाल के मजदूरों ने शनिवार को एम्स परिसर में घर जाने को लेकर हंगामा शुरू कर दिया। आरोप है कि 600 के करीब मजदूरों ने एम्स में काम कंट्रोल कर रही फर्म से बंगाल के लिए ट्रेन की मांग रखी थी जिसके लिए कंपनी द्वारा 16 मई का समय दिया गया, लेकिन हालात बिगड़ते देख करीब 8-10 पुलिस कर्मियों ने जब भीड़ में कुछ लोगों को सख्ती से समझाने को हल्का लाठीचार्ज किया तो कई मजदूरों ने पुलिस पर पथराव कर दिया। इसके चलते बचाव में पुलिस को मौके से भागना पड़ा।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार पुलिस वाहन को भगाने पर कुछ पुलिसकर्मी उसमें चढ़ने में कामयाब हो गए, लेकिन कुछ पुलिसकर्मी उसमें चढ़ नहीं सके, जिन्हें गुस्साई लेबर ने घेर लिया तथा उनसे हाथापाई भी की। इसमें पुलिस की एक प्राइवेट कार का शीशा भी पत्थरबाजी में टूट गया। इसके बाद सीनियर अधिकारी एम्स पहुंचे तथा मजदूरों को शांत किया। एम्स का निर्माण देख रही कंपनी प्रबंधन क्लांइट के अनुसार ट्रेन के अभाव में मजदूरों को बस से पश्चिम बंगाल भेजने की योजना है जिसके लिए मजदूर तैयार हैं। वहीं मजदूरों ने आरोप लगाया कि उन्हें मार्च से सैलरी नहीं मिली है। बड़ी संख्या में मजदूरों के घरों को लौटने के बाद करीब 80 फीसदी कंस्ट्रक्शन का काम ठप हो चुका है, जिसमें बाहर से मैटीरियल नहीं पहुंचने के कारण भी काम रुका हुआ है।

वहीं प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार एम्स के काम को जरूरी वर्किंग लिस्ट में शामिल रखने के चलते इसे 20 अप्रैल के आसपास पुन: शुरू करवा दिया गया था। वहीं कंस्ट्रक्शन कंपनी के अधिकारियों के अनुसार मजदूरों का 1 माह का वेतन ही बकाया है तथा घर जाने की जिद के चलते मजदूर गलत जानकारी दे रहे हैं।

सोमवार को बसों से मजदूरों को बंगाल भेजने की तैयारी

हंगामे के बाद एम्स प्रबंधन ने जिला प्रशासन से मदद को संपर्क किया और बसों के जरिए मजदूरों को करीब 1800 किलोमीटर दूर पश्चिम बंगाल भेजने की बात कही। हालांकि ट्रेन चलने को लेकर कोई भी जानकारी नहीं होने तथा मजदूरों के घर जाने की जिद पर अड़ने के बाद अब बस कंपनियों से एम्स की कंपनी बात कर रही है। करीब 500 से 600 की संख्या में मजदूरों के बंगाल जाने को लेकर एम्स में कार्यरत कंपनी किराये को लेकर बातचीत में जुटी है।



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बठिंडा में भीड़ से बचने के लिए भागते पुलिस वाले और पीछे से पत्थर फेंकते गुस्साए मजदूर।


from Dainik Bhaskar /national/news/bengali-workers-ruckus-on-the-insistence-of-going-home-in-aiims-ran-to-the-police-127307785.html
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